New World screwworm: अमेरिका में हाल ही में एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है. मैरीलैंड में एक व्यक्ति, जो हाल ही में एल साल्वाडोर से लौटा था, के शरीर में न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म (New World Screwworm) नामक परजीवी पाया गया.
यह खतरनाक कीड़ा आमतौर पर मवेशियों और जंगली जानवरों को निशाना बनाता है, लेकिन इंसानों में इसके मामले अत्यंत दुर्लभ हैं. आइए जानते हैं कि यह स्क्रूवर्म क्या है और यह हमारे शरीर पर कैसे हमला करता है.
स्क्रूवर्म क्या है?
न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म एक मक्खी का लार्वा है, जो मांसाहारी परजीवी के रूप में जाना जाता है. मादा मक्खी खुले घावों, कटे-फटे हिस्सों या त्वचा की नम सतहों पर अंडे देती है. इन अंडों से सैकड़ों छोटे-छोटे लार्वा निकलते हैं, जो त्वचा में प्रवेश कर घाव को गहरा और खतरनाक बनाते हैं. यह परजीवी मांस को खाकर जीवित रहता है, जिससे इसे "मांस खाने वाला कीड़ा" कहा जाता है.
शरीर पर हमले का तरीका
स्क्रूवर्म लार्वा सबसे पहले घाव की सतह पर प्रवेश करते हैं और धीरे-धीरे शरीर के अंदर गहराई तक पहुंचते हैं. इससे मरीज को असहनीय दर्द, जलन और घाव में हलचल का अहसास होता है. यदि समय पर उपचार न हो, तो घाव से दुर्गंध आने लगती है और बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. गंभीर मामलों में यह संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है, क्योंकि लार्वा ऊतकों को नष्ट करते हुए शरीर में गहराई तक फैलते हैं.
उपचार की चुनौतियां
स्क्रूवर्म का उपचार जटिल और दर्दनाक होता है. संक्रमित घाव से सभी लार्वा को सावधानीपूर्वक निकालना पड़ता है, और घाव को पूरी तरह कीटाणुरहित करना आवश्यक होता है. बैक्टीरियल इन्फेक्शन को रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं.
जानवरों में कीटनाशकों का उपयोग संभव है, लेकिन मानव शरीर के लिए यह तरीका उपयुक्त नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों की तुलना में मवेशी इस परजीवी के लिए अधिक आसान शिकार हैं.
आर्थिक और स्वास्थ्य जोखिम
अमेरिका का बीफ उद्योग, जो अरबों डॉलर का है, इस परजीवी के प्रसार से गंभीर खतरे में पड़ सकता है. विशेष रूप से टेक्सास जैसे राज्यों में इसका आर्थिक प्रभाव 1.8 अरब डॉलर तक हो सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस परजीवी के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की सलाह दी है.
स्क्रूवर्म का खतरा न केवल स्वास्थ्य के लिए, बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी गंभीर है. समय पर जागरूकता और उचित उपचार ही इस खतरनाक परजीवी से बचाव का एकमात्र तरीका है.