नेपाल में फिर हिली धरती! बझांग जिले में 4.2 तीव्रता के भूकंप से दहशत, एक हफ्ते में दूसरी बार आए झटके

नेपाल एक बार फिर भूकंप के झटकों से दहला. रविवार (30 नवंबर) को देश के सुदूर पश्चिम प्रांत के बझांग जिले में दोपहर 12:09 बजे भूकंप महसूस किया गया. राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NCS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 दर्ज की गई और यह 10 किलोमीटर की कम गहराई पर आया.

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Nepal earthquake: नेपाल एक बार फिर भूकंप के झटकों से दहला. रविवार (30 नवंबर) को देश के सुदूर पश्चिम प्रांत के बझांग जिले में दोपहर 12:09 बजे भूकंप महसूस किया गया. राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (NCS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.2 दर्ज की गई और यह 10 किलोमीटर की कम गहराई पर आया. कम गहराई वाले भूकंप आमतौर पर अधिक झटके महसूस कराते हैं और आफ्टरशॉक्स की आशंका भी बढ़ा देते हैं.

NCS ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भूकंप का केंद्र साइपाल पर्वत क्षेत्र रहा. झटके बझांग के साथ-साथ पास के बाजुरा जिले में भी महसूस किए गए. अचानक जमीन हिलते ही स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई और वे घरों से बाहर निकल आए. कई जगहों पर लोगों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला. हालांकि, राहत की बात यह रही कि भूकंप से किसी तरह के नुकसान या जनहानि की खबर नहीं मिली है. थोड़ी देर की घबराहट के बाद, जब कोई और झटका महसूस नहीं हुआ, लोगों ने राहत की सांस ली.

एक हफ्ते में दूसरी बार आया भूकंप

इससे पहले भी इसी क्षेत्र में 6 नवंबर को 3.6 तीव्रता का भूकंप आया था, जो 10 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया था. लगातार आ रहे झटकों ने बझांग और आसपास के जिलों में चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों के अनुसार बझांग जिला नेपाल के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों — सीस्मिक ज़ोन 4 और 5 — में आता है, इसलिए यहां हर वर्ष कई भूकंप आते हैं. गतिविधि के इस स्तर के कारण यहां छोटे झटकों से लेकर मध्यम तीव्रता के भूकंप आम माने जाते हैं.

क्यों बार-बार हिलती है नेपाल की धरती?

नेपाल दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंप का खतरा सबसे अधिक रहता है. इसका प्रमुख कारण है कि नेपाल कन्वर्जेंट बाउंड्री पर स्थित है, जहां इंडियन टेक्टोनिक प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है. इस टकराव से पृथ्वी की पपड़ी के भीतर भारी तनाव पैदा होता है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर निकलता है.

यह क्षेत्र एक सबडक्शन ज़ोन का हिस्सा है, जहां भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसक रही है. यह प्रक्रिया तनाव को और बढ़ाती है, जिससे नेपाल का इलाका भूकंपीय रूप से बेहद संवेदनशील हो जाता है. इसी टकराव के चलते हिमालय पर्वतमाला का निर्माण होता है और आज भी इसका ऊपर उठना जारी है. इस कारण भूकंपीय गतिविधि स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है.

नेपाल का भूकंप इतिहास भी लंबा और दर्दनाक रहा है. वर्ष 2015 का विनाशकारी भूकंप, जिसने हजारों लोगों की जान ले ली थी, इस क्षेत्र की संवेदनशीलता का बड़ा उदाहरण है. बार-बार आने वाले इन झटकों के कारण नेपाल में सतर्कता हमेशा बनाए रखनी पड़ती है.