ट्रंप का नया दांव: ईरान की फंडिंग से अमेरिकी किसानों को फायदा, तेहरान ने किया खारिज

अमेरिका ने ईरान की जब्त संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर नई योजना सामने रखी है, जिस पर तेहरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. ट्रंप ने ईरान की जब्त संपत्तियों को अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद में इस्तेमाल किए जाने की बात कही है.

Date Updated Last Updated : 26 June 2026, 10:22 AM IST
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बावजूद अब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का दौर जारी है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा ऐलान किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत वर्षों से फ्रीज किए गए ईरान के अरबों डॉलर का इस्तेमाल अब अमेरिकी किसानों से गेहूं, मक्का और सोयाबीन खरीदने के लिए किया जा सकता है. हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग रुख सामने आए हैं.

व्हाइट हाउस में कृषि से जुड़े एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार तलाश रहा है. उन्होंने कहा कि अब ईरान भी ऐसा बाजार बन सकता है, जहां बड़ी मात्रा में अमेरिकी अनाज भेजा जाएगा. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान में खाद्य सामग्री की भारी जरूरत है और वहां लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों का उपयोग किया जा सकता है. उनके अनुसार इस योजना पर जल्द काम शुरू होगा और इसका फायदा अमेरिकी किसानों के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों को भी मिलेगा.

12 अरब डॉलर के फंड को लेकर बनी नई योजना

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो करीब 12 अरब डॉलर की राशि अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद में इस्तेमाल की जा सकती है. वर्तमान समय में अमेरिका और ईरान के बीच व्यापार काफी सीमित है और मुख्य रूप से मानवीय जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं तक ही सीमित माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच इस योजना पर सहमति बनती है तो कई वर्षों बाद व्यापारिक संबंधों में एक नई शुरुआत देखने को मिल सकती है. हालांकि अभी तक दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं बन पाई है.

ईरान ने अमेरिकी शर्तों को नहीं माना

अमेरिका के इस प्रस्ताव पर ईरान ने अलग रुख अपनाया है. तेहरान का कहना है कि उसकी संपत्तियां यदि जारी की जाती हैं तो उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए होगा, इसका फैसला केवल ईरान करेगा. ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा कि किसी भी तरह की खरीदारी देश की जरूरत, कीमत और गुणवत्ता के आधार पर होगी, न कि अमेरिका द्वारा तय की गई शर्तों के अनुसार. उनका कहना है कि ईरान अपने नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा.

शांति वार्ता के बीच बढ़ी उम्मीदें

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन के बाद स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता का पहला दौर आयोजित किया गया. इस समझौते में कुछ शर्तों के साथ ईरान की करीब 12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने का प्रस्ताव भी शामिल बताया गया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यदि यह राशि जारी होती है तो इसका उपयोग अमेरिकी किसानों से खाद्य सामग्री खरीदने और ईरान के लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए किया जा सकता है.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी दोहराया अपना पक्ष

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जारी की जाने वाली राशि विशेष एस्क्रो खाते में रखी जाएगी, जिसकी निगरानी अमेरिका करेगा. उनके मुताबिक इस धन का उपयोग केवल अमेरिका से खाद्य और चिकित्सा सामग्री खरीदने में किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस समय मानवीय संकट का सामना कर रहा है और लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है.

ईरान ने कहा- फैसला हमारा होगा

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि फ्रीज संपत्तियां जारी होने के बाद उन पर पूरा अधिकार ईरान का होगा. उन्होंने कहा कि देश अपनी जरूरतों के अनुसार किसी भी वस्तु की खरीद कर सकता है और इस पर किसी दूसरे देश की शर्तें स्वीकार नहीं की जाएंगी. जेनेवा में ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने भी यही बात दोहराते हुए कहा कि ईरान की संपत्तियों के उपयोग का निर्णय केवल ईरान ही करेगा.

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