मोजतबा खामेनेई से मिले पेजेशकियन, स्वास्थ्य को लेकर उठे सवालों के बीच मुलाकात ने बढ़ाई चिंता

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से अहम मुलाकात की है. स्वास्थ्य को लेकर जारी चर्चाओं के बीच हुई इस बैठक ने ईरान की सियासत में हलचल बढ़ा दी है.

Date Updated Last Updated : 10 August 2026, 10:06 AM IST
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Courtesy: Screen Grab X @AviKaner

नई दिल्ली: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई से मुलाकात की है. इस मुलाकात की जानकारी रविवार को सुप्रीम लीडर के कार्यालय की ओर से दी गई. हालांकि, बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि दोनों नेताओं की मुलाकात कब और कहां हुई. मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है.

तीसरे साल की शुरुआत में हुई मुलाकात

मोजतबा खामेनेई के कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने राष्ट्रपति पद के तीसरे साल की शुरुआत में सुप्रीम लीडर से मुलाकात की और उनसे बातचीत की. हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.

यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर हाल के दिनों में कई तरह की रिपोर्ट सामने आई हैं. इसके अलावा, पद संभालने के बाद से वह सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं. ऐसे में राष्ट्रपति के साथ उनकी बैठक को ईरान की मौजूदा स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

पेजेशकियन ने संचार को लेकर जताई थी चिंता

इस मुलाकात से पहले राष्ट्रपति पेजेशकियन ने मोजतबा खामेनेई के साथ संवाद को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि मौजूदा समय में सुप्रीम लीडर से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है. इसके बावजूद उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खामेनेई ईरान की मौजूदा परिस्थितियों और संघर्ष को लेकर देश को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

पेजेशकियन ने सुप्रीम लीडर के व्यवहार की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने उनके साथ हमेशा सम्मान और समझदारी से व्यवहार किया है. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में कुछ लोग खामेनेई की अलग छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं.

बैठक से बढ़ी राजनीतिक हलचल

राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब ईरान कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. बैठक की आधिकारिक जानकारी सीमित होने के बावजूद इसके राजनीतिक और रणनीतिक महत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

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