USS लिंकन पर फंसे अमेरिकी सैनिक, परिवारों ने US नेवी की व्यवस्था पर उठाए सवाल

युद्ध को छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन कोई अंतिम कूटनीतिक या सैन्य निर्णय न निकलने के कारण अमेरिकी रक्षा बलों पर अनिश्चितकालीन तैनाती का भारी दबाव है।

Date Updated Last Updated : 09 August 2026, 02:56 PM IST
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Courtesy: AI Generated

नई जिल्ली: चीन के प्रसिद्ध सैन्य रणनीतिकार सुन जू ने अपनी ऐतिहासिक पुस्तक 'द आर्ट ऑफ वार' में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि किसी भी सेना की लंबे समय तक मोर्चे पर तैनाती देश के संसाधनों को खोखला करती है और सैनिकों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ देती है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच जारी अनिर्णीत सैन्य टकराव के दौरान यही स्थिति अमेरिकी नौसेना के सामने आ खड़ी हुई है। युद्ध को छह महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन कोई अंतिम कूटनीतिक या सैन्य निर्णय न निकलने के कारण अमेरिकी रक्षा बलों पर अनिश्चितकालीन तैनाती का भारी दबाव है। अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में शुमार 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' पर तैनात हजारों सैनिकों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को लेकर अब अमेरिका के भीतर ही गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

वापसी की कोई तारीख नहीं

नौसेना प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि मध्य पूर्व में यूएसएस लिंकन का स्थान लेने के लिए 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को भेजने की तैयारी की जा रही है, परंतु लिंकन की स्वदेश वापसी की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है। 

नौसेना अधिकारियों का कहना है कि 'ऑपरेशनल सिक्योरिटी' यानी सैन्य सुरक्षा मानकों के कारण वापसी का समय सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इस अनिश्चितता ने सैनिकों और उनके परिजनों के बीच तनाव और असंतोष को और अधिक गहरा कर दिया है।

208 दिन लगातार समंदर में बीतने का रिकॉर्ड

सैन डिएगो से 21 नवंबर को रवाना हुआ यूएसएस लिंकन युद्धपोत अब तक 259 दिनों की लंबी तैनाती पूरी कर चुका है। इस बेहद कठिन मिशन के दौरान यह विशालकाय जहाज केवल दो बार ही किसी बंदरगाह पर रुका, जिसमें सात जुलाई को ओमान में की गई एक बेहद संक्षिप्त यात्रा भी शामिल है। 

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस युद्धपोत पर तैनात करीब 5,000 नाविकों और मरीन सैनिकों ने लगातार 208 दिन बिना ज़मीन पर कदम रखे केवल समंदर के बीच बिताए हैं। इतने लंबे समय तक बिना किसी मानवीय ब्रेक के उथल-पुथल भरे समुद्री माहौल में रहने के कारण सैनिकों का मानसिक संतुलन और शारीरिक क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

टूटे शौचालय और दूषित पानी

तुर्की की आधिकारिक संवाद एजेंसी 'अनादोलू' की रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना के कार्यवाहक सचिव हुंग काओ से सैन डिएगो में लगभग 200 पीड़ित परिवारों ने सीधे तौर पर मुलाकात कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। आमतौर पर सैन्य नियमों के तहत सार्वजनिक मंचों से दूर रहने वाले परिवारों ने अब खुलकर स्थिति पर सवाल उठाए हैं। परिजनों ने बताया कि जहाज पर मूलभूत सुविधाओं का अकाल पड़ा हुआ है। टूटे हुए शौचालय, पीने के पानी में गंदगी की आशंका, शावर क्षेत्र में फफूंद जमने, और वेंटिलेशन की गंभीर समस्याओं से सैनिक जूझ रहे हैं। इसके साथ ही, सप्लाई चेन बाधित होने के कारण ताजे खाने-पीने की चीजें, व्यक्तिगत स्वच्छता उत्पाद और परिजनों की चिट्ठियां समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं। नौसेना के वरिष्ठ वाइस एडमिरल डगलस वेरिसिमो ने भी माना कि बहरीन के रास्ते होने वाली आपूर्ति श्रृंखला में भारी बैकलॉग बनने से हालात काफी बिगड़ गए थे।

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