होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान ने रखीं कड़ी शर्तें, अमेरिका से मांगा बड़ा आश्वासन

होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की कोशिशों के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने कई शर्तें रखकर मामला और पेचीदा कर दिया है. इसी बीच समुद्री हमलों और तेल रिसाव की खबरों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है.

Date Updated Last Updated : 09 August 2026, 11:26 AM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की उम्मीदों के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने शर्तों की लंबी सूची रख दी है. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका प्रतिबंध हटाने, सैन्य गतिविधियां रोकने और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसे कदम नहीं उठाता, तब तक इस रणनीतिक जलमार्ग को खोलना आसान नहीं होगा. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोल्घादर ने शनिवार को कहा कि स्ट्रेट को समुद्री यातायात के लिए खोलने से पहले अमेरिका को ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करनी होगी.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, जोल्घादर ने अमेरिका से ईरान के आसपास मौजूद सैन्य ताकत को हटाने की भी मांग की है. इसके साथ ही युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों को जारी करने की बात कही गई है. ईरान की एक और मांग है कि उसके सहयोगी देशों पर हमले रोके जाएं और ईरान को दी जाने वाली सैन्य धमकियां भी बंद हों. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने भी कहा कि स्ट्रेट को खोलने का फैसला केवल ईरान और ओमान के बीच बातचीत पर निर्भर नहीं है. उनके मुताबिक, अमेरिका को पहले ईरान की सभी शर्तें स्वीकार करनी होंगी. इन मांगों के सामने आने से होर्मुज स्ट्रेट को जल्द खोलने की संभावना को झटका लगा है. अमेरिका की ओर से इन शर्तों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

ओमान से बातचीत, लेकिन रास्ता अभी बंद

ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात के भविष्य को लेकर बातचीत जारी है. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले ही साफ कर चुके हैं कि ओमान के साथ यातायात प्रबंधन को लेकर सहमति बनने का अर्थ यह नहीं है कि स्ट्रेट तुरंत खोल दिया जाएगा. एएनआई के अनुसार, अराघची ने कहा था कि समुद्री रास्ते को फिर से खोलने के लिए अमेरिका को 14 सूत्रीय प्रारंभिक समझौते यानी एमओयू की शर्तों का पालन करना होगा. 

साथ ही संघर्ष के दौरान ईरान को हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी. होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और ऊर्जा कारोबार जुड़ा है. इसके लंबे समय तक बंद रहने से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है.

यूएई के तेल टैंकर पर मिसाइल हमले का दावा

इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने आरोप लगाया है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे उसके एक तेल टैंकर को मिसाइल से निशाना बनाया. यूएई के सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह जहाज सरकारी तेल कंपनी एडनॉक का था. यूएई के विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्र में स्वतंत्र आवाजाही के नियमों का उल्लंघन बताया है. एडनॉक के अनुसार, उसके अब तक 15 जहाज होर्मुज स्ट्रेट में मिसाइल या ड्रोन हमलों की चपेट में आ चुके हैं. कंपनी का कहना है कि इसी सप्ताह तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिसमें एक नाविक की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए.

ओमान के पास भी जहाज को बनाया गया निशाना

रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रिटिश समुद्री व्यापार संगठन यूकेएमटीओ ने भी ओमान के पूर्वी तट से करीब 18 नॉटिकल मील दूर एक जहाज पर हमले की सूचना दी है. संगठन ने बताया कि 'खसाब' नाम के जहाज को निशाना बनाया गया, लेकिन जहाज और उसके चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं.

अमेरिका भी बातचीत में शामिल

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत में अमेरिका की भूमिका का संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि वार्ता अभी बीच के चरण में है. इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने को लेकर समझौता लगभग तैयार है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वेंस के इंटरव्यू के समय उन्हें ईरान की नई शर्तों की जानकारी थी या नहीं.

पेजेश्कियान बोले- दबाव में नहीं झुकेगा ईरान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि उनका देश अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कूटनीतिक रास्ता जारी रखेगा, लेकिन किसी भी दबाव में आत्मसमर्पण नहीं करेगा. आईएएनएस के मुताबिक, उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने और युद्ध खत्म करने के लिए एमओयू पर सहमति बनाने के सरकार के फैसले का बचाव किया. उन्होंने इससे पहले अपने पद से हटने की अटकलों को भी खारिज किया था.

तेल रिसाव ने बढ़ाई पर्यावरण की चिंता

होर्मुज संकट के बीच तेल रिसाव का खतरा भी गंभीर होता जा रहा है. एपी के अनुसार, 8 जून को ओमान के समुद्री क्षेत्र में किब्लियाह द्वीप के पास 'कैरोलीन बेजेंगी' नाम के एक तेल टैंकर पर हमला हुआ था. बताया गया कि टैंकर में करीब 10 लाख बैरल कच्चा तेल था और वह ओमान के रास्ते होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहा था. ग्रीनपीस जर्मनी ने उपग्रह तस्वीरों के आधार पर दावा किया है कि तेल का रिसाव लगभग 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैल चुका है. इससे समुद्री पर्यावरण को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

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