नई दिल्ली: बैंकॉक के पास नॉनथाबुरी जिले में शुक्रवार की सुबह अचानक उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक प्रसिद्ध माध्यमिक स्कूल गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। देबसिरिन (Debsirin) स्कूल में एक छात्र ने ही अपने सहपाठियों और शिक्षकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर छात्र ने खुद को भी गोली मार ली, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। साल 2022 में एक डे-केयर सेंटर में हुई भीषण गोलीबारी में 24 मासूम बच्चों समेत 36 लोगों की जान चली गई थी, जो देश के इतिहास का सबसे भीषण नरसंहार माना जाता है।
घटना सुबह करीब 10 बजे की है, जब पो टेक तुंग (Poh Teck Tung) फाउंडेशन के राहत स्वयंसेवकों को स्कूल के भीतर गोलीबारी की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की गाड़ियां मौके की ओर दौड़ पड़ीं।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में बदहवास बच्चे और शिक्षक जान बचाने के लिए स्कूल परिसर से बाहर भागते नजर आए। घटना के लाइव वीडियो तेजी से इंटरनेट पर प्रसारित होने लगे, जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देते हुए आम जनता से लाइव स्ट्रीमिंग तुरंत रोकने की अपील की।
यह खौफनाक वारदात ऐसे समय में सामने आई है, जब देश कुछ ही महीने पहले हुए एक अन्य स्कूल हमले के सदमे से उबर भी नहीं पाया था। इसी साल फरवरी में सोंगखला प्रांत के एक स्कूल में 18 वर्षीय बंदूकधारी ने गोलीबारी कर एक शिक्षक की हत्या कर दी थी और छात्रों को बंधक बना लिया था। उससे पहले, साल 2022 में एक डे-केयर सेंटर में हुई भीषण गोलीबारी में 24 मासूम बच्चों समेत 36 लोगों की जान चली गई थी, जो देश के इतिहास का सबसे भीषण नरसंहार माना जाता है।
बार-बार दोहराई जाने वाली ये त्रासदियां थाईलैंड में बंदूकों की आसान उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देश में आम नागरिकों के पास 1 करोड़ से भी ज्यादा बंदूकें हैं, यानी हर 100 लोगों पर करीब 15 हथियार। इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस के बाद थाईलैंड में ही बंदूक से होने वाली हत्याओं की दर सबसे अधिक है। सख्त कानून बनाने के तमाम सरकारी दावों और आश्वासनों के बावजूद, हथियारों की यह निर्बाध पहुंच लगातार निर्दोषों की जान ले रही है।