Sawan Shivratri 2026: भद्रा के बावजूद कर सकते हैं जलाभिषेक? जानें पूजा का सही समय

सावन के महीने में शिवरात्रि का पर्व बेहद ही शुभ और भगवान शिव का प्रिय माना जाता है. इस साल सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा.

Date Updated Last Updated : 10 August 2026, 12:21 PM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दौरान शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं. सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि का भी हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है. इस साल (2026) सावन शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा. इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष पूजा करेंगे.

सावन शिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का प्रभाव

पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त को भद्रा काल का प्रभाव रहेगा. बताया गया है कि भद्रा सुबह से शुरू होकर दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रह सकती है. आमतौर पर शुभ कार्यों के लिए भद्रा को अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक के लिए भद्रा का दोष मान्य नहीं होता.

इसलिए भक्त भद्रा काल में भी बिना किसी चिंता के शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं. शिवरात्रि पर चारों प्रहर में पूजा करने का भी विशेष महत्व बताया गया है.

सावन शिवरात्रि की तिथि और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4:43 बजे शुरू होगी और 12 अगस्त की रात 1:51 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि और निशिता काल को ध्यान में रखते हुए सावन शिवरात्रि का व्रत और पर्व 11 अगस्त को ही मनाया जाएगा.

जलाभिषेक के लिए कौन सा समय शुभ?

महादेव के जलाभिषेक के लिए दिन में कई शुभ समय माने जाते हैं. भक्त ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और गोधूलि बेला में शिव पूजा कर सकते हैं. हालांकि, शिवरात्रि में निशिता काल का विशेष महत्व होता है. मध्यरात्रि में भगवान शिव का पूजन और अभिषेक करना धार्मिक रूप से बेहद फलदायी माना जाता है.

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद शिवलिंग का जल या पंचामृत से अभिषेक करें. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन और भस्म अर्पित करें. पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें. अंत में शिवरात्रि की कथा सुनकर या पढ़कर भगवान शिव की आरती करें.

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