चक्रवाती तूफान ‘दितवाह’ से श्रीलंका में भारी तबाही, 200 से अधिक मौतें, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

श्रीलंका इस समय चक्रवाती तूफान दितवाह की विनाशकारी मार झेल रहा है. हिंद महासागर में बना यह शक्तिशाली चक्रवात शुक्रवार को देश के पूर्वी तट से टकराया और देखते ही देखते पूरे द्वीप को भयावह तबाही में धकेल दिया.

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श्रीलंका इस समय चक्रवाती तूफान दितवाह की विनाशकारी मार झेल रहा है. हिंद महासागर में बना यह शक्तिशाली चक्रवात शुक्रवार को देश के पूर्वी तट से टकराया और देखते ही देखते पूरे द्वीप को भयावह तबाही में धकेल दिया. मूसलाधार बारिश, तेज हवाओं, बाढ़ और भूस्खलन की वजह से अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं. लाखों लोग बेघर हो गए हैं और सड़कों, बिजली तथा जलापूर्ति जैसी बुनियादी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं.

श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) ने बताया कि तूफान और उसके बाद आई बाढ़ से लगभग 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. देश की राजधानी कोलंबो में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. केलानी नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ने के बाद कई इलाके पानी में डूब गए हैं, जिससे हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थलों पर शरण लेनी पड़ी.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने शनिवार को पूरे देश में आपातकाल घोषित कर दिया और वैश्विक समुदाय से तत्काल सहायता की अपील की. इस बीच, बचाव दल लगातार राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन खराब मौसम और रास्तों के क्षतिग्रस्त होने की वजह से कई क्षेत्रों में पहुंचना मुश्किल हो रहा है.

भारत की त्वरित सहायता

श्रीलंका की पुकार पर सबसे पहले प्रतिक्रिया भारत की ओर से आई. भारत ने मानवीय सहायता के तहत तुरंत राहत सामग्री भेजी. भारतीय वायुसेना के दो विमान कोलंबो पहुंचे, जिनमें दवाइयाँ, भोजन, टेंट, पानी की बोतलें और ज़रूरी उपकरण भेजे गए.

इसके साथ ही ऑपरेशन सागर बंधु के तहत एनडीआरएफ के 80 प्रशिक्षित जवानों की दो विशेष टीमों को भी श्रीलंका रवाना किया गया है. ये टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर तलाशी और बचाव कार्यों में जुटी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आपदा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत हमेशा की तरह अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूती से खड़ा है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा.

अंतरराष्ट्रीय मदद भी जारी

भारत के अलावा अमेरिका ने भी सहायता का आश्वासन दिया है. विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के माध्यम से भोजन और आवश्यक सामग्री भेजी जा रही है. श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत जूली चंग ने कहा कि उनका देश इस कठिन समय में श्रीलंका के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है.

श्रीलंका में फंसे भारतीय सुरक्षित लौटे

तूफान के कारण कोलंबो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 320 से अधिक भारतीय नागरिक फंस गए थे. भारतीय उच्चायोग ने श्रीलंकाई अधिकारियों और भारतीय वायुसेना के सहयोग से 323 भारतीयों को सुरक्षित वापस भारत भेजा. इन लोगों ने लौटकर बताया कि स्थिति बेहद भयावह थी और राहत कार्यों ने उनकी जान बचाई.

दितवाह के कारण हुआ विनाश अभी भी जारी है, और श्रीलंका की पुनर्स्थापना में लंबे समय का संघर्ष शामिल होगा. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिल रही सहायता इस त्रासदी से उबरने में बड़ी भूमिका निभाएगी.