चीन को दो टूक, पाकिस्तान को लताड़ और बांग्लादेश को साफ संदेश! तीन मोर्चों पर भारत का कड़ा रुख

भारत ने एक ही दिन में तीन पड़ोसी देशों को अलग-अलग मुद्दों पर स्पष्ट और कड़े संदेश देकर अपनी विदेश नीति की मजबूती दिखाई है. बुधवार को विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भारत ने चीन की हरकतों पर नाराज़गी जताई, पाकिस्तान के बयानों को सिरे से खारिज किया और बांग्लादेश को कानूनी प्रक्रिया का आश्वासन देते हुए लोकतंत्र और स्थिरता का संदेश दिया.

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India Foreign Policy: भारत ने एक ही दिन में तीन पड़ोसी देशों को अलग-अलग मुद्दों पर स्पष्ट और कड़े संदेश देकर अपनी विदेश नीति की मजबूती दिखाई है. बुधवार को विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भारत ने चीन की हरकतों पर नाराज़गी जताई, पाकिस्तान के बयानों को सिरे से खारिज किया और बांग्लादेश को कानूनी प्रक्रिया का आश्वासन देते हुए लोकतंत्र और स्थिरता का संदेश दिया. इन तीनों विषयों पर भारत ने यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सबसे पहले उस घटना पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें शंघाई एयरपोर्ट पर अरुणाचल प्रदेश की एक महिला को कथित तौर पर चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों ने परेशान किया था. इस पर भारत ने दो टूक कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और इस सच्चाई को कोई भी देश झुठला नहीं सकता. उन्होंने बताया कि इस मामले में भारत ने बीजिंग और दिल्ली दोनों जगह चीन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है. उनका कहना था कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना भारत-चीन संबंधों की प्रगति के लिए अनिवार्य शर्त है और चीन की इस तरह की कार्रवाइयाँ दोनों देशों के बीच भरोसे को नुकसान पहुँचाती हैं.

चीन से आगे बढ़ते हुए भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रत्यर्पण (एक्सट्रैडिशन) मांग पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की. जयसवाल ने कहा कि भारत को अनुरोध मिला है और उस पर कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें शांति, लोकतंत्र, समावेशन और स्थिरता जैसे मूलभूत मूल्य शामिल हैं. भारत ने भरोसा दिलाया कि इस विषय पर सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत जारी रहेगी.

पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा

वहीं पाकिस्तान द्वारा अयोध्या राम मंदिर में ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर दिए गए बयान पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी. विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के बयान को उसी भाषा में खारिज करते हुए कहा कि जिस देश का मानवाधिकारों पर रिकॉर्ड लगातार सवालों में रहा है, उसे दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने का अधिकार नहीं है. भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने भीतर झांके और अपनी अल्पसंख्यकों से जुड़ी स्थिति पर ध्यान दे.

कुल मिलाकर भारत ने यह संकेत दे दिया है कि विदेश नीति के मोर्चे पर अब नरम रवैया नहीं अपनाया जाएगा. चाहे बात सीमा विवाद की हो, मानवाधिकारों की या लोकतांत्रिक प्रक्रिया की, भारत हर मुद्दे पर अपने रुख को स्पष्ट तरीके से और मजबूती के साथ सामने रखेगा.