नई दिल्ली: ब्लूटूथ ईयरबड्स और वायरलेस हेडफोन रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं. ऑफिस कॉल से लेकर जिम ट्रैवल और सोते समय पॉडकास्ट सुनने तक लोग घंटों इनका इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इनके बढ़ते इस्तेमाल के साथ, एक सवाल ये भी है कि क्या ब्लूटूथ ईयरबड्स के लंबे समय तक इस्तेमाल से ब्रेन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि आयनाइजिंग रेडिएशन शरीर के DNA को नुकसान पहुंचा सकता है और कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है.
ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?
ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) रेडिएशन के जरिए काम करती है. इसीलिए बहुत से लोग इससे डरते हैं क्योंकि 'रेडिएशन' शब्द सुनते ही कैंसर जैसी बीमारियों का ख्याल आता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्लूटूथ डिवाइस से निकलने वाला रेडिएशन नॉन-आयनाइजिंग रेडिएशन की कैटेगरी में आता है जो एक्स-रे जैसे खतरनाक आयनाइजिंग रेडिएशन से काफी अलग है.
लंबे समय तक इस्तेमाल करने से क्या होता है?
यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया में बायोइंजीनियरिंग के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. केन फोस्टर के अनुसार, ब्लूटूथ डिवाइस से निकलने वाला रेडिएशन मोबाइल फोन के मुकाबले काफी कम होता है. उन्होंने हेल्थ को बताया कि अगर कोई व्यक्ति घंटों तक वायरलेस ईयरबड्स का इस्तेमाल करता है तो भी उसका रेडिएशन एक्सपोज़र फ़ोन पर बात करने के मुकाबले कम माना जाता है.
DNA को नुकसान पहुंचा सकता है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आयनाइजिंग रेडिएशन शरीर के DNA को नुकसान पहुंचा सकता है और कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है. हालांकि, ब्लूटूथ डिवाइस नॉन-आयनाइज़िंग रेडिएशन का इस्तेमाल करते हैं जिसमें सेल्स को उसी तरह नुकसान पहुंचाने के लिए काफी एनर्जी नहीं होती है. यही वजह है कि अभी तक किसी भी रिसर्च ने ब्लूटूथ ईयरबड्स और ब्रेन कैंसर के बीच सीधा लिंक साबित नहीं किया है. हालांकि साइंटिस्ट्स का यह भी मानना है कि वायरलेस डिवाइस और RF रेडिएशन पर और रिसर्च की ज़रूरत है. मौजूद स्टडीज में इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं मिला है कि ब्लूटूथ ईयरबड्स से ब्रेन ट्यूमर या कैंसर हो सकता है.