नई दिल्ली: महिलाओं को हर महीने वाले आने वाले पीरिएड्स के दौरान होने वाला दर्द बहुत सी महिलाओं के लिए असहनीय होता है. कई महिलाओं के लिए ये हर महीने की एक कठिन वास्तविकता है. किसी महिला को यही दर्द हल्का होता है, तो किसी को इतना तेज दर्द होता है कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है.
ऐसे में तुरंत राहत पाने के लिए दर्द निवारक दवाओं का सहारा लेना आम बात है, लेकिन इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी रहती है क्या इन गोलियों का बार-बार इस्तेमाल आगे चलकर प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान होने वाला दर्द गर्भाशय की मांसपेशियों के संकुचन के कारण होता है. यह प्रक्रिया शरीर में बनने वाले कुछ रसायनों, खासकर प्रोस्टाग्लैंडिन, के कारण होती है. जब इनका स्तर अधिक होता है, तो दर्द और ऐंठन भी ज्यादा महसूस होती है. ऐसे में सूजन-रोधी दवाएं इन रसायनों के प्रभाव को कम करके राहत देती हैं.
डॉक्टरों का मानना है कि सीमित मात्रा में और जरूरत पड़ने पर ली गई दर्द की गोलियां आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होती हैं. ये दवाएं दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती हैं और कई महिलाओं को अपनी दिनचर्या सामान्य बनाए रखने में सहायक होती हैं.
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कभी-कभार ली गई दर्द की गोलियां प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं करती. हालांकि, कुछ दवाएं ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से धीमा कर सकती हैं, लेकिन यह प्रभाव स्थायी नहीं होता और इससे बांझपन का खतरा नहीं बढ़ता है.
अगर बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक या अधिक मात्रा में दवाओं का सेवन किया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए किसी भी दवा का नियमित उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.
लगातार या बहुत ज्यादा दर्द केवल सामान्य ऐंठन नहीं भी हो सकता है. यह एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉएड या पेल्विक इंफेक्शन जैसी समस्याओं का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थितियों का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं.
अगर दर्द बार-बार और असहनीय हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है. सही समय पर जांच और उपचार से न केवल दर्द से राहत मिलती है, बल्कि भविष्य में प्रजनन संबंधी समस्याओं से भी बचाव किया जा सकता है.