कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के मामले में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ अब भी न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने का संकल्प नहीं छोड़ा है. उन्होंने पहले कसम खाई थी कि जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, वह अपने बालों में कंघी नहीं करेंगी. अब विधायक बनने के बाद रत्ना देबनाथ ने इस लड़ाई को और तेज कर दिया है. उन्होंने एक बार फिर अदालत का रुख किया है और मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी की मांग उठाई है. इस पूरे मामले में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताया है.
गुरुवार को रत्ना देबनाथ ने कहा, मैंने कल अपनी शपथ ली है. आज मुझे कुछ डॉक्यूमेंट जमा करने थे. मैं यहां वही करने आई हूं. सब कुछ ठीक है. मेरी बेटी इस जंग में हमेशा मेरे साथ ही है. मैं उसके बगैर कुछ नहीं कर सकती है. वह इस जंग में भी मेरे साथ है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को लेकर उन्होंने कहा, मैं उनके बारे में कुछ नहीं कहूंगी. मुझे उनके बारे में कुछ नहीं कहना है. अगर वह चाहें, तो कोर्ट जा सकती हैं.
रत्ना देबनाथ ने 9 अप्रैल को कसम खाई थी कि वह अपनी बेटी को न्याय मिलने तक बालों में कंघी नहीं करेंगी. उन्होंने कहा था, मेरी सबसे बड़ी दुश्मन ममता बनर्जी हैं क्योंकि वह स्वास्थ्य मंत्री हैं और मेरी बेटी स्वास्थ्य विभाग में काम करती थी. ममता बनर्जी ने मेरी बेटी को क्यों नहीं बचाया? मैंने कभी अपने बालों में कंघी नहीं की, मैं कसम खाती हूं कि जब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता, मैं अपने बालों में कंघी नहीं करूंगी. मैं कल अपना नामांकन भरूंगी. लोग मेरा साथ दे रहे हैं और ममता बनर्जी को हारते हुए देखना चाहते हैं.
बुधवार को विधानसभा परिसर में बातचीत के दौरान देबनाथ ने बताया कि उनकी लड़ाई का सबसे भावुक पल तब आया, जब वह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में शामिल होने नबन्ना पहुंचीं. उन्होंने कहा, मुझे पिछले साल अगस्त का वह समय याद आ गया, जब मैंने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 'नबन्ना अभियान' में हिस्सा लेते हुए पुलिस लाठीचार्ज का सामना किया था. लेकिन इस बार नबान्ना के गेट पर तैनात कोलकाता पुलिस के कर्मी मेरे साथ सेल्फी लेना चाहते थे और वे मुझे अंदर तक लेकर गए.
पीड़िता के माता-पिता ने सियालदाह कोर्ट में नया आवेदन दायर किया है. इसमें पूर्व विधायक निर्मल घोष, सोमनाथ दास और टीएमसी पदाधिकारी संजीव मुखोपाध्याय के नाम शामिल किए गए हैं. याचिका में मांग की गई है कि इन लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में पूछताछ की जाए. आरोप लगाया गया है कि इन तीनों ने पीड़िता के जल्दबाजी में दाह संस्कार कराने में अहम भूमिका निभाई थी.शव को अस्पताल से नि
कालने का आरोप ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से शव को बाहर निकलवाकर अंतिम संस्कार कराया था. याचिका में यह भी कहा गया है कि दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने की कोशिश को भी रोका गया और दाह संस्कार से पहले जरूरी दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं कराए गए थे.
4 मई को घोषित चुनाव परिणामों में रत्ना देबनाथ ने पनीहाटी विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस को बड़े अंतर से हराया था. उन्हें कुल 87 हजार 977 वोट मिले, जबकि टीएमसी उम्मीदवार तीर्थांकर घोष को 59 हजार 141 वोट हासिल हुए. इस सीट पर लेफ्ट उम्मीदवार कलातन दासगुप्ता तीसरे और सुभाष भट्टाचार्य चौथे स्थान पर रहे.