यूक्रेन के हमलों से रूस की ऊर्जा व्यवस्था प्रभावित, पुतिन का बड़ा कबूलनामा

यूक्रेन के लगातार हमलों के बाद रूस की ऊर्जा व्यवस्था पर असर साफ दिखाई देने लगा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार ईंधन की कमी की बात को स्वीकार किया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत की संभावना है.

Date Updated Last Updated : 29 June 2026, 03:40 PM IST
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Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: यूक्रेन के लगातार हो रहे हमलों का असर अब रूस के अंदर साफ दिखाई देने लगा है. पहली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया है कि इन हमलों के कारण देश में ईंधन की कमी महसूस की जा रही है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेन युद्ध को लेकर बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से जारी युद्ध के दौरान यूक्रेन लगातार रूस के तेल और गैस से जुड़े ठिकानों को निशाना बना रहा है. इन हमलों के कारण रूस की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और कई इलाकों में ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ा है. वहीं यूक्रेन का कहना है कि यह कार्रवाई रूस की ओर से उसके शहरों और ऊर्जा ढांचे पर किए जा रहे लगातार हमलों का जवाब है.

पुतिन ने मानी ईंधन की कमी

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया कि देश के ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों से कुछ परेशानियां पैदा हुई हैं. उन्होंने कहा कि फिलहाल रूस में ईंधन की सीमित कमी देखी जा रही है, हालांकि स्थिति अभी ज्यादा गंभीर नहीं है. पुतिन के मुताबिक इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत करना और खास तौर पर क्रीमिया तक तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना है. इसके लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है.

इंटरव्यू के दौरान पुतिन ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के प्रतिनिधि जल्द मॉस्को आ सकते हैं, जहां यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने को लेकर चर्चा हो सकती है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया तब आगे बढ़ सकती है, जब अमेरिका मध्य पूर्व और ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव से कुछ हद तक मुक्त हो जाएगा.

हालांकि इस बयान का यह हिस्सा क्रेमलिन की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नहीं किया गया, लेकिन रूस की समाचार एजेंसियों और पत्रकार पावेल जारुबिन ने इसे सार्वजनिक किया. यह टिप्पणी रूस-अमेरिका संबंधों से जुड़े एक सवाल के जवाब में सामने आई.हिंदी समाचार सदस्यता

क्रीमिया में आपातकाल जैसी स्थिति

रूस के कब्जे वाले क्रीमिया क्षेत्र में हालात भी प्रभावित हुए हैं. स्थानीय प्रशासन ने तेल और गैस की कमी तथा बिजली आपूर्ति में रुकावट के कारण आपातकाल घोषित किया है. अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन द्वारा सप्लाई रूट और ऊर्जा सुविधाओं पर किए गए हमलों के चलते यह स्थिति बनी है. गौरतलब है कि रूस ने वर्ष 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था, लेकिन दुनिया के अधिकांश देश आज भी इसे यूक्रेन का हिस्सा मानते हैं.

ड्रोन हमलों से बढ़ा दबाव

युद्ध अभी भी लगातार जारी है और हाल के दिनों में यूक्रेन ने रूस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं. इन हमलों में रूस की दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब मॉस्को तेल उत्पादन बढ़ाने, ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर ईंधन आयात की योजना बना रहा था. इन ताजा हमलों के बाद पहली बार पुतिन ने सार्वजनिक रूप से माना कि देश में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है. माना जा रहा है कि यूक्रेन की रणनीति रूस की सैन्य क्षमता और युद्ध से जुड़े आर्थिक संसाधनों को कमजोर करने की है.

जेलेंस्की का बयान भी आया सामने

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेनी ड्रोन ने रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया. उनके अनुसार रूस के ऊर्जा ढांचे पर हर सफल हमला उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करता है और शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

कई इलाकों में फ्यूल सप्लाई प्रभावित

यूक्रेन के ताजा हमलों के बाद रूस के कई हिस्सों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं. कुछ शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में सीमित मात्रा में ईंधन देने की व्यवस्था भी लागू की गई है. इससे साफ है कि युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर दोनों देशों की आम जनता और जरूरी सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है

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