ग्लोबल ट्रेड के नए रूट पर भारत की नजर, पुतिन बोले- 'नॉर्दर्न सी रूट सहयोग को लेकर भारत का रुख उत्साहजनक'

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पैसिफिक फ्लीट के कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और चीन जैसे प्रमुख मित्र देश उत्तरी समुद्री मार्ग में सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार उत्सुकता दिखा रहे हैं।

Date Updated Last Updated : 13 August 2026, 02:31 PM IST
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नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद, आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री व्यापार का नया समीकरण आकार ले रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पैसिफिक फ्लीट के कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और चीन जैसे प्रमुख मित्र देश उत्तरी समुद्री मार्ग में सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार उत्सुकता दिखा रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन संघर्ष के बाद से पश्चिमी राष्ट्रों ने रूस पर आर्थिक और व्यापारिक शिकंजा कसने की पुरजोर कोशिश की है। यूरोपीय संघ द्वारा रूसी मर्चेंट जहाजों और तथाकथित 'शैडो फ्लीट' (छाया बेड़े) पर कड़े प्रतिबंध लगाने और उन्हें रोकने के कदमों पर पुतिन ने तीखा प्रहार किया। 

वैश्विक व्यापार

रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि मॉस्को हमेशा से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के दायरे में रहते हुए इस रणनीतिक मार्ग के लाभों को दुनिया के साथ साझा करने का पक्षधर रहा है। स्वेज नहर या पारंपरिक समुद्री रास्तों की तुलना में नॉर्दर्न सी रूट एशिया और यूरोप के बीच यात्रा का समय और दूरी काफी हद तक कम कर देता है। 

यही वजह है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और त्वरित आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए इस आर्कटिक मार्ग के विकास और इस्तेमाल पर रूस के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। 

नाटो को चेतावनी 

पुतिन ने मिसाइल क्रूजर 'वार्याग' पर संवाद के दौरान बाहरी ताकतों की गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि नाटो के विस्तार और पश्चिमी दखल की वजह से आर्कटिक क्षेत्र में एक 'कृत्रिम तनाव' पैदा किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन या क्षेत्रीय संप्रभुता को चुनौती देने के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

यूरोपीय संघ के रुख पर तीखा प्रहार

यूरोपीय संघ द्वारा रूसी मर्चेंट जहाजों और तथाकथित 'शैडो फ्लीट' (छाया बेड़े) पर कड़े प्रतिबंध लगाने और उन्हें रोकने के कदमों पर पुतिन ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यूरोपीय देश खुले समुद्र में रूसी व्यापारिक जहाजों को जब्त करते हैं, तो इसे 'समुद्री डकैती' माना जाएगा। रूस का जवाब सिर्फ उसी समुद्री इलाके तक सीमित नहीं रहेगा जहाँ जहाजों को रोका जाएगा, बल्कि मॉस्को अपनी सुविधानुसार कहीं भी इसका कड़ा जवाब देने के लिए स्वतंत्र रहेगा। यह घटनाक्रम दिखाता है कि एक तरफ जहाँ यूरोप के साथ रूस का टकराव नई ऊंचाइयों पर पहुँच रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत जैसे साझेदार देशों के साथ नई व्यापारिक और समुद्री साझेदारियां अधिक मजबूत हो रही हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद, आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री व्यापार का नया समीकरण आकार ले रहा है।

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