नई दिल्ली: आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों बढ़ती जा रही है. स्ट्रोक इन स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुका है, जिसे आमतौर पर 'ब्रेन अटैक' कहा जाता है. यह अचानक होता है, लेकिन इसके परिणाम लंबे समय तक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी सही समय पर पहचान और उपचार ही जीवन बचाने और डिसेबिलिटी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.
अगर विश्व स्ट्रोक संगठन के आंकड़ों की मानें तो, 25 साल से ज्यादा उम्र के हर चार में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी स्ट्रोक का खतरा रहता है.
हर साल करीब 1.2 करोड़ लोग पहली बार स्ट्रोक का शिकार होते हैं, जिनमें से करीब 65 लाख लोगों की जान चली जाती है. इसी गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर्स लगातार इसे लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं.
जॉन हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार, स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक रक्त प्रवाह अचानक रुक जाता है या किसी ब्लीडिंग के कारण बाधित हो जाता है. इससे दिमाग की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं. इसलिए इसे एक मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है, जहां हर मिनट की देरी नुकसान को बढ़ा सकती है.
अब सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए ‘BE FAST’ फॉर्मूला बताया है, जो इसे याद रखने का आसान तरीका है.
डॉक्टरों का कहना है कि जैसे ही ये लक्षण दिखें, तुरंत एम्बुलेंस बुलानी चाहिए. मरीज को खुद अस्पताल ले जाने के बजाय मेडिकल टीम को बुलाना बेहतर होता है, क्योंकि एम्बुलेंस में ही शुरुआती इलाज शुरू किया जा सकता है और अस्पताल को पहले से सूचना दी जा सकती है.