'रिजेक्शन नहीं झेल पाई..' अकेले कमरे में फूट-फूटकर रोई सुहाना, नहीं बनना चाहती थी अभिनेत्री

शाहरुख खान की शहजादी सुहाना खान ने हाल ही में अपने अभिनय करियर के सफर को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका एक्टिंग में आने का कुछ खासा मन नहीं था.

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Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: शाहरुख खान की शहजादी सुहाना खान ने हाल ही में अपने अभिनय करियर के सफर को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका एक्टिंग में आने का कुछ खासा मन नहीं था. उन्हें अभिनय में कोई रुचि नहीं थी. लेकिन बाद में उन्होंने धीरे-धीरे अभिनय में अपनी रूचि स्थापित की और अब वह पूरी तरह से एक्टिंग के रंग में रंग चुकी हैं. साथ ही सुहाना ने खुलासा किया कि वाह कमरे में अकेले रोया करती थीं. 

इस कारण एक्टिंग में आई शाह रुख की लाडली

सुहाना खान ने अपने एक इंटरव्यू में अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए एक बड़ा खुलासा किया. उन्होंने कहा कि पहले वह अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थी उन्हें स्टेज पर बहुत ही असहज लगता था. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें अभिनय करना अजीब लगता था और वह पूरी तरह सहज नहीं थी. लेकिन बाद में वह स्कूल के नाटको में धीरे-धीरे हिस्सा लेने लगी. उसके बाद से उनके अंदर अभिनय को लेकर लगाव पैदा होने लगा. 

अकेले कमरे में खूब रोई थी सुहाना

हालांकि, बोर्डिंग स्कूल के दौरान सुहाना की सोच में बड़ा बदलाव आया. सुहाना ने एक नाटक के लिए ऑडिशन दिया और उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें मुख्य भूमिका मिलेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्हें कोरस ग्रुप में शामिल कर लिया गया. यह अनुभव उनके लिए काफी निराशाजनक था. उन्होंने बताया कि वह इस रिजेक्शन के बाद वह अपने कमरे में अकेले बैठकर खूब रोई थीं.

सुहाना ने आगे बताया कि यही वो पल था जब उन्हें पहली बार एहसास हुआ कि अभिनय उनके लिए कितना मायने रखता है. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें समझ आया कि वह सच में वह एक्टिंग लाईन में जाना चाहती हैं. 

पिता की राय रखती है मायनें

इसी बातचीत के दौरान सुहाना ने अपने माता-पिता शाहरुख खान और गौरी खान को अपना सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम बताया है. उन्होंने कहा कि जीवन और करियर से जुड़े सभी बड़े फैसलों में उनके माता-पिता की राय शामिल होती है. साथ ही सुहाना ने बताया कि वह केवल अपने दिल की सुनती हैं. 

उन्होंने बताया कि शाहरुख खान जहां गहरी और दार्शनिक सलाह देते हैं, वहीं गौरी खान सीधी और व्यावहारिक होती हैं. इन दोनों के अलग-अलग नजरियों से उन्हें संतुलन मिलता है और वे ज़मीन से जुड़ी रहती हैं.