विजय की ‘जना नायकन’ पर फिर ब्रेक! CBFC सर्टिफिकेट रद्द, थिएटर रिलीज पर सस्पेंस

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जना नायकन' एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंस गई है. इस फिल्म को पोंगल के मौके पर रिलीज होना था, लेकिन एक बार फिर से इसकी रिलीजिंग रोक दी गई है.

Date Updated Last Updated : 27 January 2026, 01:01 PM IST
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Courtesy: Social Media

चेन्नई: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जना नायकन' एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंस गई है. जिस फिल्म को पोंगल के मौके पर दर्शकों के सामने आना था, उसकी रिलीज पर अब भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. मद्रास उच्च न्यायालय के ताजा फैसले ने न केवल फिल्म के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सेंसर प्रक्रिया और न्यायिक हस्तक्षेप को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है.

मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी, अरुल मुरुगन शामिल थे, ने 27 जनवरी को एकल न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया. बता दें उसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को 'जना नायकन' को यू/ए सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया था. इस फैसले के साथ ही फिल्म को फिलहाल सिनेमाघरों में रिलीज की अनुमति नहीं मिल सकी है.

सिंगल बेंच के आदेश पर डिवीजन बेंच की असहमति

यह मामला CBFC द्वारा दायर अपील के बाद डिवीजन बेंच के सामने पहुंचा था. बोर्ड ने 9 जनवरी को दिए गए उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें एकल न्यायाधीश ने फिल्म निर्माताओं द्वारा सुझाए गए कट्स लागू करने के बाद सर्टिफिकेट्स देने को कहा था. डिवीजन बेंच ने उसी दिन इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी और 20 जनवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

विजय की आखिरी फिल्म बताई जा रही 'जना नायकन' 

एच. विनोथ के निर्देशन में बनी 'जना नायकन' अभिनेता विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है. इसके बाद विजय 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले पूरी तरह सक्रिय राजनीति में उतरने वाले हैं. यही वजह है कि इस फिल्म को लेकर न केवल सिनेमा प्रेमियों, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी खास दिलचस्पी है.

जानिए क्यों टली पोंगल रिलीज? 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिल्म को 9 जनवरी को पोंगल के अवसर पर दुनियाभर में रिलीज किया जाना था. हालांकि, कानूनी विवाद और सेंसर से जुड़ी अड़चनों के चलते इसकी रिलीज को अंतिम समय में टालना पड़ा. इससे निर्माताओं और फैंस को बड़ा झटका लगा था.

सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई याचिका

फिल्म निर्माताओं ने जांच समिति द्वारा सुझाए गए कट्स को लागू कर दिया था, इसके बावजूद सीबीएफसी को फिल्म में दिखाई गई  सामग्री को लेकर एक आंतरिक शिकायत मिली. इसके बाद बोर्ड ने फिल्म को एक समीक्षा समिति के पास भेज दिया. इस कदम से नाराज होकर निर्माताओं ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए उन्हें मद्रास हाईकोर्ट जाने की ही सलाह दी.

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