पटना: बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है. लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहने वाले मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के बेटे ने आखिरकार सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया है. इस फैसले ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है, क्योंकि यह कदम ऐसे समय पर आया है जब राज्य की सत्ता में भी बड़े बदलाव की चर्चा चल रही है.
बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने औपचारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता ग्रहण कर ली है. पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि वह एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में संगठन को मजबूत करने का प्रयास करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता का राज्यसभा जाने का फैसला व्यक्तिगत है और वे उनके मार्गदर्शन में काम करते रहेंगे.
75 वर्षीय नीतीश कुमार ने 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है. माना जा रहा है कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं. बिहार में विकास और प्रशासनिक सुधारों के कारण उन्हें 'सुशासन बाबू' के नाम से भी जाना जाता है.
बता दें नीतिश कुमार के बेटे निशांत इससे पहले सार्वजनिक जीवन और मंचो से दूर थे. निशांत कुमार इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं. यह काफी हद तक नीतीश कुमार की उस सोच के अनुरूप था जिसमें वे वंशवाद की राजनीति के विरोधी माने जाते रहे हैं. हालांकि अब उनके राजनीति में आने को जेडीयू नेताओं ने सकारात्मक कदम बताते हुए स्वागत किया है.
निशांत के राजनीति करियर में प्रवेश करने के बाद से कई अटकलें तेज हो गई हैं. राजनीति में प्रवेश करते ही अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उन्हें भाजपा-जेडीयू गठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में असामान्य कदम है. उन्होंने भाजपा पर राजनीतिक रणनीति के तहत यह बदलाव कराने का आरोप लगाया और कहा कि इससे जेडीयू के पारंपरिक समर्थकों में असंतोष बढ़ सकता है.