नई दिल्ली: ईरान को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. इस बार निशाने पर वह कथित नेटवर्क है, जिस पर ईरानी एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) को दूसरे देशों के ईंधन के रूप में दिखाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का आरोप है. अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए ईरानी गैस की असली पहचान छिपाई जा रही थी और प्रतिबंधों से बचने के लिए जटिल कारोबारी तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा था.
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने शुक्रवार को एक विस्तृत बयान जारी कर कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये संस्थाएं और लोग ईरान पर लागू प्रतिबंधों को दरकिनार करने में कथित रूप से मदद कर रहे थे. अमेरिका के अनुसार, यह नेटवर्क ईरानी मूल की एलपीजी को ओमानी ईंधन के रूप में पेश कर विभिन्न देशों तक पहुंचाता था. इस कथित गतिविधि के जरिए ईंधन की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने का प्रयास किया जाता था, ताकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी और प्रतिबंधों से बचा जा सके.
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से बांग्लादेश सहित दक्षिण और पूर्वी एशिया के कई देशों तक एलपीजी पहुंचाई जा रही थी. जांच में यह भी सामने आया कि व्यापारिक दस्तावेजों और आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव कर ईंधन की पहचान को छिपाया जाता था. वाशिंगटन का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को कमजोर करती हैं और ईरान को वैकल्पिक माध्यमों से राजस्व जुटाने का अवसर देती हैं.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क ने अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कई देशों में स्थापित फ्रंट कंपनियों का उपयोग किया. विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात और चीन में मौजूद कुछ कंपनियों के जरिए कारोबारी लेन-देन किए जाने का आरोप लगाया गया है. इसके अलावा विदेशी बैंक खातों और तथाकथित "शैडो फ्लीट" से जुड़े जहाजों का भी इस्तेमाल किया गया. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन जहाजों के माध्यम से माल की वास्तविक उत्पत्ति को छिपाने और प्रतिबंधों से बचने की कोशिश की गई.
अमेरिका ने केवल ऊर्जा कारोबार तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी है. एक ईरानी विदेशी मुद्रा विनिमय कंपनी को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है. आरोप है कि इस कंपनी ने प्रतिबंधित ईरानी बैंकों की ओर से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन कराने में सहायता की. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ऐसे वित्तीय नेटवर्क ईरान को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद आर्थिक गतिविधियां जारी रखने में मदद करते हैं.