नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. उत्तरी इराक में एक गिराए गए ईरानी ड्रोन से जुड़े विस्फोटक को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की जान चली गई. इस घटना ने पहले से जारी सैन्य तनाव को और गंभीर बना दिया है. वहीं, अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से लगातार जवाबी सैन्य कार्रवाई जारी है, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं.
अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने रविवार को जानकारी दी कि 18 जुलाई को उत्तरी इराक में एक गिराए गए ईरानी एकतरफा हमलावर ड्रोन के अवशेषों से मिले अविघटित बमों को नियंत्रित तरीके से नष्ट किया जा रहा था. इसी दौरान विस्फोट हुआ, जिसमें एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई. सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में बताया कि यह कार्रवाई क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए की जा रही थी. हादसे में एक अन्य सैनिक भी घायल हुआ है. अधिकारियों के अनुसार उसकी चोटें गंभीर नहीं हैं और उसका इलाज जारी है.
इस ताजा घटना के बाद 28 फरवरी से शुरू हुए मौजूदा संघर्ष के दौरान जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है. सेना ने यह भी बताया कि एक अलग अभियान के दौरान लापता अमेरिकी सैनिकों से जुड़े कुछ अज्ञात मानव अवशेष मिले हैं. फिलहाल विशेषज्ञ उनकी पहचान की पुष्टि करने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं.
इराक की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब एक दिन पहले जॉर्डन में दो अमेरिकी सैन्यकर्मी ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से सुरक्षा अभियान के दौरान मारे गए थे. इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है. सेंटकॉम ने कहा कि मृत सैनिकों के परिवारों को आधिकारिक सूचना दिए जाने तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जाएगी. सेना ने परिवारों की निजता का सम्मान करने की बात भी दोहराई.
जॉर्डन में हुई घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया. अमेरिकी सेना के अनुसार इन हमलों का उद्देश्य उन ईरानी सैन्य इकाइयों को निशाना बनाना था, जिन्हें अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है. सेंटकॉम ने कहा कि इन हमलों का मकसद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े सैन्य ठिकानों और संसाधनों को नुकसान पहुंचाना था, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके.
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने पलटवार करते हुए कुवैत में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले करने का दावा किया. ईरानी सेना के अनुसार कैंप उदैरी के गोला-बारूद डिपो और अली अल सलेम एयर बेस पर मौजूद पैट्रियट रडार प्रणाली को निशाना बनाया गया. उधर, बहरीन की सेना ने कहा कि उसने ईरान की ओर से किए गए कई हवाई हमलों को समय रहते रोक दिया. सेना का दावा है कि इन हमलों में नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई थी.
जॉर्डन में इजरायली और जॉर्डन की संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था ने अकाबा बंदरगाह की दिशा में बढ़ रही एक ईरानी मिसाइल को बीच रास्ते में ही मार गिराया. मिसाइल खतरे को देखते हुए इलाके में सायरन भी बजाए गए. वहीं, कुवैत के बिजली मंत्रालय ने बताया कि उसके एक बिजली और समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र पर लगातार दूसरे दिन हमला हुआ. इस हमले के कारण वहां आग लग गई, हालांकि राहत और बचाव दल ने स्थिति पर जल्द नियंत्रण पा लिया.
बढ़ते तनाव के बीच इजरायल भी अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुट गया है. एक वरिष्ठ इजरायली सैन्य अधिकारी ने बताया कि अमेरिका क्षेत्र में अतिरिक्त हवाई ईंधन भरने वाले विमानों की तैनाती की तैयारी कर रहा है. इससे संकेत मिलते हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो सैन्य अभियान का दायरा और बढ़ाया जा सकता है. हालांकि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इजरायल इस समय अमेरिकी हमलों की हालिया कार्रवाई में सीधे शामिल नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार जारी है.
इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी सैन्य दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है. खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर वाले समझौते को भी पूरी तरह खारिज करते हुए उसे बेअसर और अमान्य बताया. उनके इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव फिलहाल कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है.