नई दिल्ली: अगर आप अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का सपना देख रहे हैं या ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है. नए नियम के तहत अब हर आवेदक की आर्थिक स्थिति, भविष्य में खुद का खर्च उठाने की क्षमता और सरकारी सहायता पर निर्भर रहने की संभावना का गहराई से आकलन किया जाएगा. माना जा रहा है कि इस बदलाव का असर हजारों विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीय आवेदकों पर भी पड़ सकता है.
अमेरिकी सरकार ने 'पब्लिक चार्ज' से जुड़े नियम को दोबारा लागू करने के लिए अंतिम नियम (Final Rule) जारी किया है. इस नियम का उद्देश्य यह तय करना है कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति भविष्य में सरकारी सहायता पर निर्भर तो नहीं होगा. इस नई व्यवस्था के तहत हर आवेदन का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा. इमिग्रेशन अधिकारी यह देखेंगे कि आवेदक की आर्थिक स्थिति कितनी मजबूत है और क्या वह अमेरिका में स्थायी रूप से रहने के बाद अपने खर्चों का स्वयं प्रबंधन कर सकेगा.
अमेरिकी इमिग्रेशन कानून में 'पब्लिक चार्ज' ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है जिसके बारे में यह आशंका हो कि वह भविष्य में अपने जीवन-यापन के लिए मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहायता पर निर्भर हो सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जिसने कभी किसी सरकारी सुविधा का लाभ लिया हो, उसका आवेदन अपने-आप खारिज कर दिया जाएगा. अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह आकलन करना होगा कि भविष्य में उस व्यक्ति के सरकारी सहायता पर निर्भर होने की संभावना कितनी है.
नए नियम के अनुसार, इमिग्रेशन अधिकारी केवल एक या दो पहलुओं को नहीं देखेंगे, बल्कि आवेदक की पूरी परिस्थिति का मूल्यांकन करेंगे. इस दौरान कई महत्वपूर्ण बातों पर विचार किया जाएगा, जैसे-
आवेदक की उम्र
स्वास्थ्य की स्थिति
पारिवारिक जिम्मेदारियां
शिक्षा और योग्यता
पेशेवर कौशल
आर्थिक संसाधन
रोजगार मिलने की संभावना
भविष्य में स्वयं का खर्च उठाने की क्षमता
इन सभी पहलुओं को मिलाकर यह तय किया जाएगा कि आवेदक ग्रीन कार्ड पाने के योग्य है या नहीं.
इस नियम का सबसे बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि अब इमिग्रेशन अधिकारियों को निर्णय लेने में पहले से अधिक विवेकाधिकार मिलेगा. पुराने नियमों में मूल्यांकन के लिए सीमित मानदंड थे, लेकिन अब अधिकारियों को हर आवेदन की समग्र परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसला लेने की छूट होगी. यानी प्रत्येक मामला अलग तरीके से देखा जाएगा और सभी तथ्यों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security - DHS) ने इस नियम को सार्वजनिक टिप्पणी के लिए जारी किया है. इसे 20 जुलाई को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा. यदि किसी अदालत की ओर से इस पर रोक नहीं लगाई जाती है, तो यह नियम प्रकाशन के 60 दिन बाद यानी 18 सितंबर से प्रभावी हो जाएगा.
यह नया नियम मुख्य रूप से उन लोगों पर लागू होगा जो अमेरिका में स्थायी निवास (Permanent Residency) के लिए आवेदन कर रहे हैं. इसमें 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' के जरिए ग्रीन कार्ड पाने वाले और इमिग्रेंट के रूप में प्रवेश करने वाले आवेदक शामिल हैं. हालांकि, H-1B, F-1, L-1 और B-1/B-2 जैसे अस्थायी वीजा धारकों के मौजूदा वीजा नियमों में इस बदलाव से कोई सीधा परिवर्तन नहीं किया गया है.
इस नियम का असर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों पर भी पड़ सकता है. खासकर वे लोग जो परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर रहे हैं या जिनके परिवार के सदस्य पहले से अमेरिका में स्थायी निवासी हैं. इसके अलावा रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले भारतीय पेशेवर भी इस नए नियम के दायरे में आएंगे. अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय H-1B वीजा पर काम करते हैं और बाद में 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' के माध्यम से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं. ऐसे मामलों में अब आर्थिक स्थिति और आत्मनिर्भरता से जुड़े पहलुओं की पहले से अधिक विस्तार से जांच की जाएगी.