अमेरिका की बमबारी से भड़का ईरान, तेहरान बोला- अब कोई सीमा सुरक्षित नहीं

अमेरिका ने लगातार सातवीं रात ईरान पर सैन्य कार्रवाई जारी रखी, जिसके बाद तेहरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी अभियान की चेतावनी दी. ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सैन्य सलाहकार ने चेतावनी दी कि ईरान अब केवल जवाबी कार्रवाई तक ही सीमित नहीं रहेगा.

Date Updated Last Updated : 18 July 2026, 09:36 AM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार गहराता जा रहा है. अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को लगातार सातवीं रात ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए, जिसके बाद तेहरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि अगर यह कार्रवाई नहीं रुकी तो जवाब पहले से कहीं ज्यादा बड़ा और व्यापक होगा.  ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सैन्य सलाहकार ने चेतावनी दी कि ईरान अब केवल जवाबी कार्रवाई तक ही सीमित नहीं रहेगा और कोई भी राजनीतिक सीमा सुरक्षित नहीं रहेगी.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि उसकी सेना ने शुक्रवार रात भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखा. यह लगातार सातवीं रात थी जब अमेरिकी बलों ने ईरान के अलग-अलग रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया. अमेरिका का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्र में बढ़ते खतरे को नियंत्रित करना है. 

ईरान ने दी बड़े हमले की चेतावनी

अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मेजर जनरल मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि यदि अमेरिका अगले दो से तीन दिनों तक इसी तरह हमले जारी रखता है, तो ईरान बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि अब ईरान केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा. जरूरत पड़ने पर व्यापक स्तर पर ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिनका असर पूरे क्षेत्र में देखने को मिल सकता है.

'कोई भी सीमा सुरक्षित नहीं रहेगी'

ईरानी समाचार एजेंसी आईआरआईबी के अनुसार, मेजर जनरल रेज़ाई ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी राजनीतिक सीमा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता. उनके इस बयान को क्षेत्र के देशों के लिए गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.

पहले भी अमेरिकी सहयोगी देशों को बनाया गया था निशाना

हाल के दिनों में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच शांति वार्ता सफल नहीं हो सकी. इसके बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ीं. इसी दौरान ईरान की ओर से कतर, कुवैत और जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं. इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया. अब दोनों देशों के बीच तनाव लगातार नए स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है.

होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ी चिंता

रिपोर्टों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित एक निगरानी टावर को नुकसान पहुंचने के बाद ईरान ने फारस की खाड़ी के महत्वपूर्ण बंदरगाहों को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है. यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य संघर्ष अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है.

दक्षिणी ईरान में बुनियादी ढांचे को हुआ नुकसान

लगातार हो रही अमेरिकी बमबारी के दौरान दक्षिणी ईरान के कई पुल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि इनमें कुछ पुल बंदर अब्बास से जुड़े प्रमुख मार्गों पर स्थित हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाते हैं. इन ढांचों को नुकसान पहुंचने से स्थानीय आवाजाही और सैन्य गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है.

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