खार्ग द्वीप पर कब्जे की चर्चा से मचा हड़कंप, ट्रंप की धमकी पर ईरान की सख्त चेतावनी

खार्ग द्वीप को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है. ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका ने उसके क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या जमीनी घुसपैठ की कोशिश की, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

Date Updated Last Updated : 21 July 2026, 09:52 AM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के रणनीतिक महत्व वाले खारग द्वीप को लेकर दिए गए सख्त संकेतों के बाद तेहरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका ने उसके क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या जमीनी घुसपैठ की कोशिश की, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. 

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने मीडिया से बातचीत के दौरान अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी सेना किसी भी तरह का जमीनी अभियान चलाने की कोशिश करती है, तो उसे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा. बगाई ने कहा कि ईरान में ऐसे लोग मौजूद हैं जो किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप का जवाब देने के लिए तैयार हैं. उनका कहना था कि अगर अमेरिका आगे बढ़ता है, तो उसे उसके नतीजे भी भुगतने होंगे.

क्यों इतना महत्वपूर्ण है खारग द्वीप?

खारग द्वीप ईरान के तेल उद्योग का सबसे अहम केंद्र माना जाता है. यह बुशहर प्रांत के तट से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित है और देश के तेल निर्यात का सबसे बड़ा आधार है. बताया जाता है कि ईरान के कुल तेल निर्यात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप के जरिए दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. यहां गहरे समुद्री जल की सुविधा होने के कारण बड़े-बड़े तेल टैंकर आसानी से लोडिंग कर सकते हैं. यही वजह है कि खारग द्वीप को ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है.

अंतरिम समझौते पर दोहराया ईरान का रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस समझौते में किसी भी तरह की अस्पष्टता नहीं है और इसका पूरा ढांचा स्पष्ट रूप से तय किया गया है. बगाई के अनुसार, समझौते का दस्तावेज छोटा है और इसमें कुल 14 खंड शामिल हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास इस समझौते से पीछे हटने या इसे तोड़ने का कोई उचित कारण नहीं है.

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी रखा अपना पक्ष

ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना पुराना रुख दोहराया. बगाई ने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के भविष्य से जुड़े फैसलों में ईरान की प्रमुख भूमिका रहेगी. उन्होंने बताया कि इस विषय पर ओमान और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ बातचीत के जरिए आगे की रणनीति तय की जाएगी. ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान भी क्षेत्रीय सहयोग से ही संभव है.

ट्रंप के बयानों से बढ़ा तनाव

हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह चुके हैं. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने के कई विकल्पों पर विचार कर रहा है. इन विकल्पों में हवाई हमलों को तेज करना, खारग द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने की संभावना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाना भी शामिल बताया गया है. हालांकि इन योजनाओं पर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है.

विशेषज्ञों ने दी अलग राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका खारग द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने में सफल होता है, तो इससे ईरान के तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ सकता है. इससे तेहरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की संभावना है. हालांकि इसके साथ ही अमेरिकी सेना को ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं का भी सामना करना पड़ सकता है. इसलिए इस तरह की किसी भी कार्रवाई को बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है.

किंग्स कॉलेज लंदन के सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ एंड्रियास क्रीग का कहना है कि सैन्य क्षमता के आधार पर अमेरिका किसी छोटे ईरानी द्वीप पर अस्थायी रूप से कब्जा करने की क्षमता रखता है. लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी क्षेत्र पर कब्जा करना और लंबे समय तक उस पर नियंत्रण बनाए रखना दो बिल्कुल अलग चुनौतियां हैं. उनके अनुसार, किसी द्वीप की सुरक्षा, आपूर्ति व्यवस्था और रणनीतिक लाभ बनाए रखना बेहद कठिन और महंगा साबित हो सकता है.

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