नई दिल्ली: हिंदू धर्म और ज्योतिष दोनों में ही समय की गणना और शुभ-अशुभ समय को बहुत महत्व दिया जाता है. इसी व्यवस्था के आधार पर आज हम 'पंचक' नाम के एक खास संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण समय में प्रवेश कर रहे हैं. यह पंचक शुक्रवार से शुरू हो रहा है इसलिए ज्योतिष के नजरिए से इसे 'मृत्यु पंचक' भी कहा जाता है. इसे बहुत अशुभ माना जाता है.
ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार जब चंद्रमा लगातार पांच नक्षत्रों (धनिष्ठा नक्षत्र से रेवती नक्षत्र तक) से होकर गुजरता है तो पांच दिनों की इस खास अवधि को पंचक कहा जाता है. इस दौरान कुछ खास काम करने की सख्त मनाही होती है.
जून 2026 का पंचक आज यानी शुक्रवार, 6 जून की शाम 07:03 बजे शुरू हुआ. यह अशुभ समय अगले पांच दिनों तक चलेगा और गुरुवार, 11 जून 2026 की सुबह 08:16 बजे खत्म होगा. पंचक का यह अशुभ समय शुक्रवार से शुरू हो रहा है इसलिए माना जाता है कि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का असर दूसरे पंचकों की तुलना में ज्यादा होगा. इसलिए लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जाती है.
पंचक काल में विशेष रूप से दक्षिण दिशा की तरफ यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि इस दिशा को यमराज और नकारात्मक शक्तियों की दिशा माना जाता है. इस अवधि में नए मकान का निर्माण कार्य शुरू करना या घर की छत डलवाना बेहद अशुभ माना जाता है.
ऐसा करने से धन और जन की हानि की आशंका रहती है. इन पांच दिनों में घर के लिए नया फर्नीचर बनवाना, लकड़ी का काम शुरू करना या ईंधन के लिए लकड़ी इकट्ठा करने जैसे कार्यों से तौबा कर लेनी चाहिए.
पंचक के दौरान नई चारपाई बुनवाना, नया बेड या गद्दा खरीदना अथवा बनवाना पूरी तरह वर्जित माना गया है. मान्यता है कि पंचक काल में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो परिवार पर पंचक दोष लगता है. इसके निवारण के लिए शव के दाह-संस्कार के समय आटे या कुशा के पांच पुतले बनाकर उनका भी विधि-विधान से दाह-संस्कार करने का नियम है.
यह मृत्यु पंचक है, इसलिए इन दिनों मन में किसी भी प्रकार के बुरे विचार या नकारात्मकता न आने दें. विवादों, लड़ाई-झगड़ों और क्लेश से दूरी बनाए रखें. इस संवेदनशील समय में सात्विक जीवन शैली अपनाना, गायत्री मंत्र का जाप करना और मानसिक शांति बनाए रखना ही व्यक्ति को इसके दुष्प्रभावों से सुरक्षित रख सकता है.