नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जिनकी प्रतिभा ने शुरुआती दौर में तो सबको प्रभावित किया, लेकिन उनका सफर अपेक्षाओं के मुताबिक लंबा नहीं चल पाया. ऐसी ही एक कहानी है पूर्व लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन की, जिनकी गेंदबाजी ने बड़े-बड़े बल्लेबाजों को परेशान किया, लेकिन उनका करियर कई अनकहे अनुभवों से प्रभावित रहा. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने जीवन के कुछ ऐसे पहलुओं को साझा किया, जो आज भी उन्हें भीतर तक प्रभावित करते हैं.
शिवरामकृष्णन ने बताया कि उनके करियर में गिरावट सिर्फ खेल से जुड़ी वजहों के कारण नहीं थी, बल्कि कुछ व्यक्तिगत और सामाजिक अनुभव भी इसके पीछे जिम्मेदार रहे. इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर हुए नस्लभेद टिप्पणी का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि बहुत कम उम्र में ही उन्हें इसका सामना करना पड़ा.
शिवरामकृष्णन ने एक इंटरव्यू में बताया कि महज 14 साल की उम्र में उन्हें अपने जीवन का पहला कड़वा अनुभव झेलना पड़ा, जो जिंदगी भर उनके जहन में बस गया. उन्होंने बताया कि चेपॉक स्टेडियम में नेट बॉलर के रूप में मौजूद रहने के दौरान एक वरिष्ठ भारतीय खिलाड़ी ने उन्हें स्टाफ समझकर अपने जूते साफ करने को कहा. इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया, हालांकि उस समय वे नस्लभेद जैसी चीजों से पूरी तरह परिचित नहीं थे.
शिवरामकृष्णन ने खुलासा करते हुए बताया कि घरेलू क्रिकेट में भी उन्हें रंग को लेकर काफी ताने सुनने पड़े. तमिलनाडु टीम के कुछ खिलाड़ी उन्हें उनके रंग के आधार पर चिढ़ाते थे. यह व्यवहार लगातार उनके आत्मविश्वास पर असर डालता रहा, लेकिन उन्होंने इसे सहते हुए केवल अपने खेल पर ध्यान बनाए रखा.
इन सभी घटनाओं के बाद भी वह इतने नहीं टूटे जितना उन्हें एक घटना ने तोड़ दिया. उन्होंने अपने एक बर्थडे का जिक्र करते हुए कहा कि उनका सबसे खराब और खौफनाक अनुभव उनके 17वें जन्मदिन का था, एक सीनियर खिलाड़ी ने उनके रंग को लेकर मजाक किया.
सीनियर प्लेयर ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि 'सांवले लड़के के लिए इतना गहरा चॉकलेट केक'. इतना कहकर वह हंसने लगे. इस टिप्पणी शिवरामकृष्णन इतने आहत हुए कि केक काटने से इनकार कर दिया. उस समय सुनील गावस्कर ने उन्हें समझाकर शांत किया.