चूहों से इंसान और फिर इंसान से इंसान… MV हॉन्डियस क्रूज से फैला हंटावायरस

ऐंटार्कटिका जा रहे लग्जरी क्रूज 'एमवी हॉन्डियस' पर हंटावायरस संक्रमण की पुष्टि के बाद कई देशों में अलर्ट जारी किया गया है. जहाज पर हुई मौतों और संक्रमित यात्रियों के अलग-अलग देशों में पहुंचने से स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है.

Date Updated Last Updated : 09 May 2026, 03:15 PM IST
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Courtesy: AI Generated

Hantavirus Outbreak: दुनिया अभी युद्ध और वैश्विक तनावों से जूझ ही रही थी कि इसी बीच एक लग्जरी क्रूज जहाज से सामने आई खबर ने सभी की चिंता बढ़ा दी है. ऐंटार्कटिका की शानदार यात्रा पर निकले यात्रियों के बीच अचानक एक खतरनाक वायरस फैलने की आशंका ने कई देशों में हड़कंप मचा दिया. यह मामला उस समय गंभीर हो गया जब जहाज पर लगातार लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और बाद में कुछ यात्रियों में हंटावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई. साथ ही पाया गया है कि वायरस ऐसा स्ट्रेन था, जो इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. यही वजह है कि अब 23 देशों के स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर हैं और कई यात्रियों की निगरानी की जा रही है.

लग्जरी ऐंटार्कटिका ट्रिप बना डर की वजह

यह पूरा मामला लग्जरी क्रूज जहाज “एमवी हॉन्डियस” से जुड़ा है. यह जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया शहर से रवाना हुआ था. जहाज में कुल 147 लोग सवार थे, जिनमें 88 यात्री और बाकी चालक दल के सदस्य शामिल थे. यह यात्रा बेहद खास मानी जा रही थी क्योंकि जहाज को अंटार्कटिका, फॉकलैंड द्वीप, साउथ जॉर्जिया और त्रिस्तान दा कुन्या जैसे दूर-दराज इलाकों तक जाना था. जहाज पर सवार लोग अलग-अलग 23 देशों से आए थे. अंटार्कटिका की यात्रा आम यात्राओं जैसी नहीं होती. वहां होटल या शहर नहीं होते, इसलिए पर्यटक क्रूज जहाज पर रहकर ही बर्फीले इलाकों, पेंगुइन और व्हेल जैसी दुर्लभ चीजों का अनुभव लेते हैं.

पहले यात्री की मौत से बढ़ा शक

यात्रा शुरू होने के कुछ दिन बाद 6 अप्रैल को एक 70 वर्षीय डच यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई. उन्हें तेज बुखार, सिरदर्द और पेट से जुड़ी समस्या होने लगी. जहाज पर मौजूद डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन हालत लगातार खराब होती गई. 11 अप्रैल को उस यात्री को सांस लेने में दिक्कत होने लगी और बाद में उनकी मौत हो गई. उस समय जहाज समुद्र के बीच था और जांच की पूरी सुविधा मौजूद नहीं थी, इसलिए मौत की असली वजह तुरंत सामने नहीं आ सकी. क्रूज कंपनी ने शुरुआत में इसे सामान्य प्राकृतिक मौत बताया. शव को जहाज के विशेष फ्रीजर में रखा गया ताकि अगले पड़ाव पर उतारा जा सके.

पहली मौत के बाद जहाज पर मौजूद यात्रियों के बीच डर फैलने लगा. कुछ लोगों को अपनी तबीयत भी खराब लगने लगी, हालांकि उस समय तक किसी को संक्रमण की सही जानकारी नहीं थी. बाद में जहाज त्रिस्तान दा कुन्या और फिर सेंट हेलीना द्वीप पहुंचा. यहां मृत यात्री का शव उतारा गया और उनकी पत्नी भी जहाज से उतर गईं. इसी दौरान एक और ब्रिटिश यात्री बीमार पड़ गया. मौत और बीमारी की खबर फैलने के बाद कई यात्रियों ने यात्रा बीच में छोड़ने का फैसला कर लिया. करीब 30 से 40 यात्री सेंट हेलीना से अलग-अलग देशों के लिए रवाना हो गए.

विमान में बिगड़ी पत्नी की तबीयत

मृत डच यात्री की 69 वर्षीय पत्नी ने 25 अप्रैल को सेंट हेलीना से दक्षिण अफ्रीका के जोहानेसबर्ग के लिए उड़ान भरी. लेकिन यात्रा के दौरान ही उनकी हालत बिगड़ गई और वे विमान में बेहोश हो गईं. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अगले दिन उनकी भी मौत हो गई. अस्पताल में किए गए टेस्ट में पता चला कि वह हंटावायरस से संक्रमित थीं. यहीं से मामला बेहद गंभीर हो गया क्योंकि यह साधारण हंटावायरस नहीं बल्कि “ऐंडीज हंटावायरस” था, जो इंसान से इंसान में भी फैल सकता है.

क्या है हंटावायरस?

हंटावायरस आमतौर पर चूहों से फैलता है. यह वायरस चूहों के पेशाब, मल या लार में पाया जाता है. अगर कोई इंसान संक्रमित चूहों के संपर्क में आए या दूषित धूल सांस के जरिए शरीर में चली जाए तो संक्रमण हो सकता है. इस बीमारी में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. गंभीर मामलों में फेफड़े और किडनी प्रभावित हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, हंटावायरस आमतौर पर इंसान से इंसान में नहीं फैलता, लेकिन ऐंडीज स्ट्रेन अलग माना जाता है. यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से देख रही हैं.

जहाज पर फिर हुई एक और मौत

स्थिति और ज्यादा खराब तब हुई जब 2 मई को जहाज पर एक जर्मन यात्री की भी मौत हो गई. इसके बाद जहाज में सवार लोगों के बीच घबराहट बढ़ गई. 3 मई को जहाज अफ्रीकी देश केप वर्ड पहुंचा, लेकिन वहां के अधिकारियों ने खतरे को देखते हुए जहाज को किनारे लगने की अनुमति नहीं दी. जहाज को समुद्र में ही रोक दिया गया. विश्व स्वास्थ्य संगठन को 2 मई को मामले की जानकारी दी गई.

जांच में पुष्टि हुई कि जहाज पर पाए गए संक्रमण का संबंध ऐंडीज हंटावायरस से है. सबसे बड़ी चिंता उन यात्रियों को लेकर हुई जो बीच रास्ते में जहाज छोड़कर अपने देशों के लिए निकल चुके थे. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, कनाडा, सिंगापुर और नीदरलैंड्स समेत कई देशों के लोग शामिल थे. अब अलग-अलग देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां इन यात्रियों और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी कर रही हैं. कई यात्रियों को आइसोलेशन में रखा गया है.

जहाज पर फंसे यात्रियों की बढ़ी चिंता

रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक कुल 8 मामले सामने आए हैं, जिनमें 5 में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है जबकि 3 संदिग्ध हैं. तीन लोगों की मौत हो चुकी है और एक व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका में आईसीयू में भर्ती है. जहाज पर मौजूद लोग फिलहाल अपने-अपने केबिन में अलग रह रहे हैं. बताया जा रहा है कि जहाज के डॉक्टर भी बीमार पड़ गए हैं. अब जहाज को स्पेन के कैनरी द्वीप ले जाया जा रहा है, जहां यात्रियों को उतारने और पूरे जहाज को सैनिटाइज करने की तैयारी है.

हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि आम लोगों को फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. संगठन के अनुसार यह वायरस कोरोना जैसी तेजी से फैलने वाली बीमारी नहीं है.

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