नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच खुद को ‘मध्यस्थ’ के तौर पर पेश कर रहे पाकिस्तान को अब एक बड़े रक्षा सौदे में शामिल होने का मौका मिला है. इस डील के जरिए पाकिस्तान को अपने F-16 लड़ाकू विमानों के लिए तकनीकी और इंजीनियरिंग सपोर्ट मिलने जा रहा है, जिससे उसकी वायुसेना को मजबूती मिल सकती है.
अमेरिकी वायुसेना ने Northrop Grumman के साथ 488 मिलियन डॉलर का समझौता किया है. इस कॉन्ट्रैक्ट में पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल है जिन्हें F-16 के रडार सिस्टम के लिए सहायता दी जाएगी. यह डील ऐसे समय पर आई है जब पाकिस्तान ईरान-अमेरिका वार्ता में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.
इस समझौते के तहत APG-66 और APG-68 जैसे एडवांस रडार सिस्टम के लिए तकनीकी सपोर्ट प्रदान किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट 2036 तक चलेगा और इसका उद्देश्य F-16 फाइटर जेट्स की क्षमता को बनाए रखना और उन्हें अपग्रेड करना है.
इस डील में पाकिस्तान के अलावा इजरायल, कतर, मिस्र और तुर्किये जैसे देश भी शामिल हैं. हालांकि, खास बात यह है कि पाकिस्तान को यह मौका ऐसे समय पर मिला है जब वह अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बना हुआ है.
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 बेड़े को मजबूत करने के लिए कदम उठाया है. इससे पहले दिसंबर 2025 में अमेरिका ने 686 मिलियन डॉलर का अपग्रेड पैकेज मंजूर किया था.
इस पैकेज में Link-16 सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड और ट्रेनिंग शामिल थे. अमेरिका ने उस समय कहा था कि यह कदम उसकी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति’ के हित में है.
अमेरिका का कहना है कि इस तरह के रक्षा समझौते उसके सहयोगी देशों की सैन्य क्षमता को मजबूत करते हैं और उन्हें भविष्य के खतरों से निपटने में सक्षम बनाते हैं.
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका अपने सहयोगियों को अपने रक्षा सिस्टम से जोड़कर क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है. इस डील पर अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे देशों की नजर बनी हुई है.
भारत लंबे समय से पाकिस्तान को F-16 दिए जाने का विरोध करता रहा है. अमेरिका का कहना है कि ये विमान आतंकवाद के खिलाफ इस्तेमाल के लिए हैं, जबकि भारत का मानना है कि इनका उपयोग उसके खिलाफ भी किया जा सकता है.
हालांकि, मौजूदा अपग्रेड को ‘गेम-चेंजर’ नहीं माना जा रहा है. पाकिस्तान के F-16 विमान पुराने हो चुके हैं और यह अपग्रेड मुख्य रूप से उनकी क्षमता बनाए रखने के लिए है.
भारत के Dassault Rafale लड़ाकू विमान अभी भी तकनीकी रूप से पाकिस्तान के F-16 से आगे हैं. यह अपग्रेड पाकिस्तान को संचार और विश्वसनीयता में मदद जरूर करेगा, लेकिन राफेल की 4.5 जेनरेशन टेक्नोलॉजी को चुनौती नहीं दे पाएगा.