पाकिस्तान के दिग्गज मौलाना इदरीस पर जानलेवा हत्या, जानिए पूरा मामला

मौलाना इदरीस तरंगजई पाकिस्तान के एक प्रमुख धार्मिक नेता और इस्लामी विद्वान थे, जिन्हें “शेख-उल-हदीस” के नाम से भी जाना जाता था। वह कट्टरपंथी और प्रभावशाली धार्मिक शख्सियत माने जाते थे और उनके करीबी संबंध जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठन से जोड़े जाते थे.

Date Updated Last Updated : 05 May 2026, 02:10 PM IST
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Courtesy: Social Media

Mualana Muhammad Idrees: मंगलवार को पाकिस्तान के मशहूर धार्मिक गुरु जिन्हें "शेख-उल-हदीस" के नाम से जाना जाता था, मौलाना मुहम्मद इदरीस तरंगजई की गोली मारकर हत्या कर दी गई. यह घटना चरसद्दा के उस्मानज़ई इलाके में हुई, जहां अज्ञात बंदूकधारियों ने उन पर गोलियां चला दी. बताया जा रहा है कि मौलाना जैश-ए-मोहम्मद के समर्थक भी थे.

पुलिस कांस्टेबल घायल

घटना मुस्लिम मॉडल स्कूल के पास एक व्यस्त सड़क पर हुई, जहां स्थानीय लोग सड़क किनारे खड़े थे और सुरक्षा बल इलाके को सुरक्षित करने में लगे थे. इस हमले में ड्यूटी पर तैनात दो पुलिस कांस्टेबल भी गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है.

हमलावर फरार

पुलिस के अनुसार, हमलावर वारदात के तुरंत बाद मौके से फरार हो गए. घटना के समय मौलाना इदरीस जिस वाहन में यात्रा कर रहे थे, उस पर गोलियां चलीं। बाद में चरसद्दा के अस्पताल ने उनकी मौत की पुष्टि की. घटनास्थल से प्राप्त वीडियो फुटेज में सफेद रंग की कार का पिछला शीशा पूरी तरह से टूटा हुआ दिख रहा है और कार पर कई गोलियों के निशान मौजूद हैं. गोलीबारी के बाद इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई, जिसमें आम लोग और पुलिसकर्मी घटना के दृश्य कैमरे में कैद करते नजर आए.

इदरीस तरंगजई कौन थे?

मौलाना इदरीस पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के बीच एक प्रभावशाली शख्सियत थे. वह अक्सर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के साथ अपने करीबी रिश्तों को लेकर सुर्खियों में रहते थे. पाकिस्तानी पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह हत्या किसी अंदरूनी झगड़े का नतीजा थी या यह एक टारगेटेड किलिंग थी.

मौलाना इदरीस तरंगजई पाकिस्तान के एक प्रमुख धार्मिक नेता और इस्लामी विद्वान थे, जिन्हें “शेख-उल-हदीस” के नाम से भी जाना जाता था। वह कट्टरपंथी और प्रभावशाली धार्मिक शख्सियत माने जाते थे और उनके करीबी संबंध जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठन से जोड़े जाते थे.

 इदरीस अक्सर धार्मिक और राजनीतिक मामलों में चर्चा में रहते थे और उनके विचारों और गतिविधियों का व्यापक असर था. उनका प्रभाव विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान के धार्मिक समुदायों में देखने को मिलता था.उनकी हत्या ने देश में हलचल मचा दी है और यह घटना पाकिस्तान में कट्टरपंथ और सुरक्षा मामलों पर नए सवाल खड़े कर रही है.

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