बांग्लादेश क्रिकेट में फिर घमासान, बयान से बीसीबी ने झाड़ा पल्ला, खिलाड़ियों ने मैच के बहिष्कार की दी धमकी

बांग्लादेश क्रिकेट एक बार फिर बड़े विवाद में फंस गया है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के निदेशक नजमुल इस्लाम के बयान के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अब बोर्ड ने उनके बयान से खुद को अलग कर लिया है. 

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नई दिल्ली: बांग्लादेश क्रिकेट एक बार फिर बड़े विवाद में फंस गया है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के निदेशक नजमुल इस्लाम के बयान के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अब बोर्ड ने उनके बयान से खुद को अलग कर लिया है. 

वहीं दूसरी ओर अब खिलाड़ी टूर्नामेंट का बहिष्कार करने की चेतावनी दे रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत में होने वाले आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है.

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

यह विवाद तब शुरू हुआ जब नजमुल इस्लाम ने कुछ राष्ट्रीय खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ी उन्हें मिल रहे समर्थन और सुविधाओं के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं. इस बयान को खिलाड़ियों और क्रिकेट जगत के कई लोगों ने अपमानजनक माना. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई पूर्व क्रिकेटरों और प्रशंसकों ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी. 

मामला तब और गंभीर हो गया जब नजमुल ने पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को 'भारतीय एजेंट' कह डाला. तमीम ने हाल ही में बोर्ड से अपील की थी कि भारत में होने वाले टी20 विश्व कप को लेकर कोई भी फैसला भावनाओं में बहकर नहीं लिया जाना चाहिए.

बीसीबी ने बयान से झाड़ा पल्ला

नजमुल के बयान ने विवाद का रूप ले लिया है अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने इस बढ़ते विरोध को देखते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने  नजमुल इस्लाम की टिप्पणियों से खुद को बिलकुल अलग कर लिया. बोर्ड ने कहा कि यदि किसी बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो उसे खेद है, और यह स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां बोर्ड की आधिकारिक राय नहीं हैं.

बीसीबी ने यह भी साफ किया कि केवल बोर्ड के अधिकृत प्रवक्ता या मीडिया विभाग के जरिए जारी बयान ही आधिकारिक माने जाएंगे. इसके अलावा दिए गए बयान व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं, जिनकी जिम्मेदारी बोर्ड नहीं लेगा.

खिलाड़ियों ने दी बहिष्कार की धमकी

इस विवाद के बाद खबरें सामने आई थी कि खिलाड़ी बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) के एक मैच का बहिष्कार कर सकते हैं. खिलाड़ियों का कहना है कि जब तक बोर्ड साफ तौर पर उनका समर्थन नहीं करता और उनके सम्मान की रक्षा नहीं करता, तब तक वे मैदान पर उतरने को तैयार नहीं हैं.