नई दिल्लीः देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षाओं को कराने वाले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अब एक ऐसा डिजिटल अभेद्य किला तैयार कर लिया है, जिसे भेदना किसी भी जालसाज के लिए नामुमकिन होगा. UPSC की परीक्षाओं में अब फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है. आयोग का यह कदम किसी सनसनी से कम नहीं है, क्योंकि अब उम्मीदवार की पहचान केवल कागजों पर नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की नजरों से जांची जाएगी.
UPSC की वेबसाइट पर जारी एक गोपनीय सूचना ने उन लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है जो पहचान बदलकर या फर्जी तरीके से परीक्षा देने की फिराक में रहते थे. अब परीक्षा केंद्र के गेट पर हर अभ्यर्थी को एक हाई-टेक कैमरे के सामने खड़ा होना होगा.
यह AI आधारित तकनीक उम्मीदवार के चेहरे की लाइव तस्वीर को उनके आवेदन फॉर्म में लगी फोटो से डिजिटल रूप से मिलाएगी. इस रहस्यमयी और सटीक मिलान प्रक्रिया में मात्र 8 से 10 सेकंड का समय लगेगा. यानी, पलक झपकते ही सिस्टम यह बता देगा कि सामने खड़ा व्यक्ति असली हकदार है या कोई मुन्नाभाई.
इस नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने से पहले सितंबर 2025 में गुपचुप तरीके से एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था. NDA और CDS जैसी परीक्षाओं के दौरान गुरुग्राम के कुछ चुनिंदा केंद्रों पर इस तकनीक का परीक्षण हुआ, जो पूरी तरह सफल रहा. UPSC के चेयरमैन अजय कुमार के अनुसार इस तकनीक ने न केवल सटीकता दिखाई, बल्कि प्रवेश प्रक्रिया को भी काफी तेज कर दिया.
UPSC देश की सर्वोच्च सेवाओं IAS, IFS, IPS, NDA और CDS—के लिए अधिकारियों का चयन करता है. इन पदों की गरिमा और सुरक्षा को देखते हुए आयोग ने नकल और फर्जीवाड़े के खिलाफ यह सख्त रुख अख्तियार किया है. यह कदम न केवल पारदर्शिता लाएगा, बल्कि उन योग्य उम्मीदवारों के भरोसे को भी मजबूत करेगा जो दिन-रात मेहनत कर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं.