नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची ने इस बार देश के राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन की एक नई तस्वीर पेश की है. 131 पुरस्कारों के इस वितरण में जहां महाराष्ट्र संख्या के मामले में शीर्ष पर है, वहीं केरल ने सम्मान के स्तर के मामले में बाजी मार ली है. इस सूची में दक्षिण भारत और चुनावी राज्यों की मजबूत उपस्थिति को कूटनीतिक और रणनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है. केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में इन राज्यों से बड़ी संख्या में सम्मान मिलना केंद्र की एक्ट ईस्ट और आउटरीच नीति का हिस्सा माना जा रहा है.
इस साल की सबसे बड़ी खबर केरल से आई है. देश के कुल 5 पद्म विभूषणों में से 3 अकेले केरल की झोली में गिरे हैं. पूर्व जज केटी थॉमस, पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत कम्युनिस्ट नेता वीएस अच्युतानंदन और RSS के वरिष्ठ विचारक पी नारायणन को देश के दूसरे सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है. खास बात यह है कि केरल की कुल पुरस्कार संख्या पिछले साल के 5 से बढ़कर 8 हो गई है.
राज्यों की सूची में महाराष्ट्र एक बार फिर सबसे आगे रहा है. कुल 15 पुरस्कारों के साथ इसने अपनी बढ़त बनाए रखी है. अभिनेता धर्मेंद्र को पद्म विभूषण, जबकि अलका याग्निक, पीयूष पांडे और उदय कोटक को पद्म भूषण मिला है. इसके अलावा 11 हस्तियों को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है.
क्षेत्रों के आधार पर देखें तो दक्षिण भारतीय राज्यों (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी) को कुल 40 पुरस्कार मिले हैं, जो पिछले साल के 36 से अधिक है. तमिलनाडु 13 पुरस्कारों के साथ दूसरे स्थान पर है. पश्चिम बंगाल में भी पुरस्कारों की संख्या 8 से बढ़कर 11 हो गई है.
दक्षिण और बंगाल का ग्राफ चढ़ा है, वहीं उत्तर भारत की कुल संख्या 33 से घटकर 27 और पश्चिम भारत की 23 से घटकर 20 हो गई है. हालांकि, उत्तर प्रदेश (11 पुरस्कार) में वायलिन वादक एन राजम को पद्म विभूषण देकर राज्य की सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखा गया है.