महंगे तेल की टेंशन? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया क्यों भारत पर नहीं होगा बड़ा असर; लोकसभा में दिया बड़ा बयान

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर के पार पहुंच गई हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वस्त किया है कि कम घरेलू महंगाई के कारण भारत पर इसका तात्कालिक असर सीमित रहेगा.

Date Updated Last Updated : 09 March 2026, 10:33 PM IST
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नई दिल्ली: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वैश्विक तेल संकट पर सरकार का दृष्टिकोण साझा किया. उन्होंने बताया कि 28 फरवरी 2026 को ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा, जिससे तेल आपूर्ति बाधित हुई है. हालांकि, पिछले वर्षों में खुदरा महंगाई दर में आई निरंतर गिरावट ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक सुरक्षा कवच दिया है. वित्त मंत्री के अनुसार घरेलू महंगाई आरबीआई के लक्ष्य के निचले दायरे में होने के कारण तेल की बढ़ती कीमतों का तुरंत बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

जियो पॉलिटिकल तनाव ने तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है. अमेरिका और इजरायल की ईरान पर कार्रवाई के बाद सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है. भारतीय बास्केट की एफओबी कीमत 69.01 डॉलर से बढ़कर 80.16 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है. चूंकि मध्य पूर्व दुनिया का बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है, इसलिए वहां की अशांति से कीमतों का बढ़ना स्वाभाविक है. सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रही है.

महंगाई पर सीमित असर का भरोसा 

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि तेल की कीमतों का महंगाई पर प्रभाव केवल दर पर निर्भर नहीं होता. रुपये का एक्सचेंज रेट और वैश्विक मांग जैसे कई कारक इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. चूंकि देश में महंगाई पहले से ही निचले स्तर पर है. इसलिए इस बार दबाव बहुत ज्यादा नहीं होगा. निर्मला सीतारमण ने जोर देकर कहा कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सरकार तेल के झटकों से निपटने के लिए प्रयास कर रही है.

खुदरा महंगाई दर में निरंतर गिरावट 

पिछले वर्षों में खुदरा महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है. 2023-24 में सीपीआई महंगाई 5.4 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में गिरकर 4.6 प्रतिशत रह गई. अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक यह घटकर मात्र 1.8 प्रतिशत पर आ गई है. जनवरी 2026 में महंगाई 2.75 प्रतिशत दर्ज की गई, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य के काफी नीचे है. महंगाई के इस गिरते स्तर ने भारत को वैश्विक अस्थिरता के बीच मजबूती दी है.

आरबीआई की सक्रिय मौद्रिक नीति 

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सक्रियता दिखाई है. फरवरी 2025 से नीतिगत दरों में कुल 125 आधार अंकों की कटौती की गई है. इस कदम ने बाजार को तरलता प्रदान की है और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है. वित्त मंत्री ने विश्वास जताया कि ये उपाय वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में मददगार साबित होंगे और बाजार को सहारा मिलता रहेगा.

सरकार के राहत और नियंत्रण उपाय 

सरकार ने महंगाई रोकने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिनमें बफर स्टॉक बढ़ाना. आयात आसान करना और निर्यात पर रोक शामिल है. इसके अलावा आयकर में बड़ी छूट दी गई है, जिससे अब 12.75 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो गई है. जीएसटी में बदलाव और खाद्यान्न की सस्ती दरों पर उपलब्धता से आम आदमी को राहत मिली है. ये सभी उपाय तेल की बढ़ती कीमतों के आर्थिक प्रभाव को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे.

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