नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को एक अनोखा और चर्चित विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई 'कॉक्रोच जनता पार्टी' (CJP) पहली बार सड़क पर उतरी और इसके संस्थापक अभिजीत दीपके के पहुंचते ही हजारों लोगों की भीड़ वहां जमा हो गई. प्रदर्शन में शामिल लोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों ने इस आंदोलन को केवल एक विरोध नहीं, बल्कि युवाओं की नाराजगी का मंच बताया.समाचार पत्र विज्ञापन
अभिजीत दीपके के जंतर-मंतर पहुंचने के साथ ही प्रदर्शन स्थल पर लोगों का आना लगातार बढ़ने लगा. कुछ ही समय में पूरा क्षेत्र लोगों से भर गया. यहां केवल प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी मौजूद थे जो इस आंदोलन को करीब से देखना और अपने कैमरे में कैद करना चाहते थे. कई यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स भी मौके पर पहुंचे. सभा को संबोधित करते हुए दीपके ने कहा कि कई लोग उनके ऑनलाइन अभियान का मजाक उड़ाते थे और पूछते थे कि सोशल मीडिया से क्या बदलेगा. उन्होंने कहा कि आज जंतर-मंतर की भीड़ इस बात का जवाब है कि लोगों के भीतर कितना गुस्सा और असंतोष जमा है.
पुणे से आए एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह केवल किसी एक मंत्री या एक परीक्षा का मामला नहीं है. उनका कहना था कि देश में युवाओं से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से अनदेखे किए जा रहे हैं और अब लोग अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं. राजस्थान के अलवर से पहुंचे 21 वर्षीय लक्ष्य वर्मा ने कहा कि जब छात्र अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं तो अक्सर उन्हें दबाने की कोशिश होती है. उन्होंने कहा कि वे इस आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए विशेष रूप से दिल्ली आए हैं और इसे लंबी लड़ाई मानते हैं.
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल हुए जिनका नीट, सीबीएसई या अन्य हालिया परीक्षाओं से सीधा संबंध नहीं था. वे केवल छात्रों के समर्थन में यहां पहुंचे थे. एक महिला ने कहा कि उन्होंने कई सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया है और बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया है.
उत्तर प्रदेश से आए दो शिक्षकों ने बताया कि वे रोजाना सैकड़ों छात्रों को पढ़ाते हैं. उनका कहना था कि जब परीक्षा में गड़बड़ियां होती हैं तो छात्रों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने कहा कि छात्रों की मेहनत और उम्मीदों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है.
अब तक 'कॉक्रोच जनता पार्टी' मुख्य रूप से सोशल मीडिया तक सीमित थी, लेकिन जंतर-मंतर के इस प्रदर्शन ने उसे जमीन पर भी पहचान दिला दी है. पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पहले ही करोड़ों फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं और इस आंदोलन के जरिए पहली बार लोगों को इसके संस्थापक से सीधे मिलने का मौका मिला.इस आंदोलन को कई राजनीतिक दलों और नेताओं का समर्थन भी मिला. समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने युवाओं की आवाज को बदलाव की शुरुआत बताया. वहीं शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों छात्रों के सपनों को नुकसान पहुंचाया है और युवाओं की इस नाराजगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
इस प्रदर्शन को उस समय और अधिक चर्चा मिली जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के समर्थक सोनम वांगचुक भी इसमें शामिल हुए. उन्होंने भी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का समर्थन किया. जंतर-मंतर पर नारेबाजी और भाषणों के बीच जब प्रदर्शनकारियों से व्यक्तिगत रूप से बात की गई तो एक समान समस्या बार-बार सामने आई- परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और पेपर लीक से छात्रों का टूटता भरोसा.
प्रदर्शन में शामिल कई लोग पेपर लीक के मुद्दे को लेकर बेहद भावुक नजर आए. एक अभिभावक ने बताया कि उनका बेटा नीट परीक्षा का उम्मीदवार था. उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही अनियमितताओं ने बच्चों का मनोबल कमजोर कर दिया है. उन्होंने कहा कि छात्र सालों तक मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगते हैं तो उनका भरोसा टूट जाता है. ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होना जरूरी है.