नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार सुबह तेजी देखने को मिली. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश यानी गोल्ड और सिल्वर की ओर बढ़ा है. हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना के चलते इनकी तेजी पर कुछ हद तक लगाम भी लगी हुई है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी की कीमतों में भी हल्की मजबूती आई. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशक दो बड़े कारकों पर नजर बनाए हुए हैं. पहला, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और दूसरा, अमेरिका की मौद्रिक नीति. तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे सोने और चांदी की मांग बढ़ जाती है.
हाल के कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई, लेकिन वैश्विक हालात अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं. यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के समुद्री मार्गों को लेकर दी गई चेतावनी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं.
यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में अमेरिकी फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है या फिर उनमें और बढ़ोतरी कर सकता है. इसका असर सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों पर पड़ता है.
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी को फिलहाल भू-राजनीतिक तनाव का सहारा मिल रहा है, लेकिन अमेरिकी फेड की सख्त नीति इनके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. बाजार पहले से ही इस साल के अंत तक ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना को ध्यान में रखकर चल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बुलियन मार्केट की दिशा तय करेंगे.
जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर पर नजर रखना जरूरी होगा. वहीं चांदी ने हाल के निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दिखाई है, जिससे इसमें मजबूती के संकेत मिल रहे हैं. अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो सोने और चांदी की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है.