15 अगस्त से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा आह्वान, बोले- भारत को चाहिए 'शांतिपूर्ण क्रांति'

सोनम वांगचुक ने स्वतंत्रता दिवस से पहले देश में बड़े लेकिन शांतिपूर्ण बदलाव की जरूरत बताते हुए ‘भारत के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन’ का आह्वान किया है. उन्होंने बेहतर नेतृत्व, मजबूत शिक्षा व्यवस्था पर भी जोर दिया.

Date Updated Last Updated : 14 August 2026, 11:22 AM IST
फॉलो करें:
Courtesy: PINTEREST

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से पहले शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देश के भविष्य और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. उन्होंने भारत में नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत बताते हुए ‘शांतिपूर्ण क्रांति’ और ‘भारत के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन’ का आह्वान किया. उनका कहना है कि 2047 तक भारत को मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शासन और नेतृत्व के स्तर पर बड़े बदलाव जरूरी हैं.

शिक्षा को बताया देश के विकास की कुंजी

अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि किसी भी देश की तरक्की उसकी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी होती है. उनके मुताबिक, जब तक शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक देश के विकास की रफ्तार भी सीमित रहेगी.

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई ऐसे देश, जिन्हें कभी भारत के बराबर या पीछे माना जाता था, आज कई क्षेत्रों में आगे निकल चुके हैं. इसलिए भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए अपनी प्राथमिकताओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.

समस्या किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं

वांगचुक ने कहा कि देश की मौजूदा समस्याओं को केवल किसी एक पार्टी की सरकार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके अनुसार, अलग-अलग दलों की सरकारों के दौरान भी विरोध की आवाजों को दबाने के आरोप सामने आते रहे हैं. इसलिए बदलाव की जरूरत राजनीतिक दलों से आगे व्यवस्था के स्तर पर है.

उन्होंने 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में राजनीतिक बदलाव जरूर आया, लेकिन भ्रष्टाचार और अन्य समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं.

नेतृत्व में बदलाव की जरूरत पर जोर

वांगचुक ने कहा कि भारत को एक बड़े लेकिन शांतिपूर्ण बदलाव की आवश्यकता है. उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की दिशा तय करने में योग्य, ईमानदार और जिम्मेदार लोगों की भूमिका बढ़नी चाहिए.

उन्होंने संसद और राजनीति में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे जनप्रतिनिधियों की संख्या को लेकर भी चिंता जताई. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि राजनीति में कई ईमानदार और सम्मानित लोग मौजूद हैं.

लोगों से मांगे अच्छे नेतृत्व के नाम

वांगचुक ने नागरिकों से अपने-अपने क्षेत्र से ऐसे लोगों के नाम सुझाने की अपील की, जो निस्वार्थ, निर्भीक और चरित्रवान हों. उनका उद्देश्य ऐसे लोगों को एक मंच पर लाना है, जो देश के भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच रखते हैं.

उन्होंने आने वाले समय में देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा कर लोगों से संवाद करने की योजना भी बताई. अपने संदेश के अंत में उन्होंने लोगों से ‘भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ शुरू करने की अपील की और इसे अलग-अलग भाषाओं में लोगों तक पहुंचाने की बात कही.

सम्बंधित खबर