नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए घातक विस्फोट को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के पीछे अल-कायदा से जुड़े संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के एक गुट का हाथ था. इस धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी.
संयुक्त राष्ट्र की मॉनिटरिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि AQIS अब छोटे और अलग-अलग सेल के जरिए अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है. संगठन ने कथित तौर पर लॉजिस्टिक्स और फंडिंग से जुड़े नेटवर्क भी विकसित किए हैं.
STORY | UNSC sanctions report says Red Fort attack 'officially attributed' to Al-Qaeda in Indian Subcontinent
The Red Fort terror attack in New Delhi in November last year has been “officially attributed” to Al-Qaeda in the Indian Subcontinent (AQIS), according to a new report… pic.twitter.com/uD2burStS6
— Press Trust of India (@PTI_News) August 13, 2026
रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुआ हमला शुरुआत में AQIS से जुड़ा पाया गया था. UN ने यह भी आशंका जताई है कि संगठन दक्षिण एशिया में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की कोशिश कर सकता है.
10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास एक वाहन में रखे विस्फोटक उपकरण में धमाका हुआ था. इस घटना में 11 लोगों की जान चली गई थी. जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उमर उन-नबी को मुख्य आरोपी बताया था. वह फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिकल का पूर्व सहायक प्रोफेसर था और विस्फोट में उसकी भी मौत हो गई थी.
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में सामने आया मॉड्यूल AQIS की विचारधारा से प्रभावित था और हमले को एक बड़ी आतंकी साजिश के तहत अंजाम देने की योजना बनाई गई थी.
UN की रिपोर्ट में बताया गया है कि AQIS का ढांचा पहले की तुलना में बदल रहा है. अब बड़े समूहों के बजाय छोटे और विकेंद्रीकृत सेल के जरिए गतिविधियां संचालित करने की कोशिश की जा रही है. इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे नेटवर्क की पहचान और उन्हें रोकना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
रिपोर्ट में AQIS के अफगानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में सक्रिय रहने और बांग्लादेश में नए सेल स्थापित करने की संभावित कोशिशों को लेकर भी चिंता जताई गई है.
UN की रिपोर्ट में आतंकवादी संगठनों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आतंकी समर्थक AI टूल्स का इस्तेमाल विस्फोटक बनाने और संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि आतंकी संगठन अपनी फंडिंग, प्रचार और काम करने के तरीकों में बदलाव कर सुरक्षा एजेंसियों से बचने की कोशिश कर रहे हैं.