सर्दियों का साइलेंट किलर, हीटर और अंगीठी बन रहे मौत का फंदा, दिल्ली से बिहार तक उजड़ रहे परिवार

उत्तर भारत में जारी भीषण शीतलहर के बीच घर को गर्म रखने की कोशिशें जानलेवा साबित हो रही हैं. पिछले कुछ हफ्तों में दिल्ली के आधुनिक फ्लैट्स से लेकर पंजाब और बिहार के ग्रामीण अंचलों तक.

Date Updated Last Updated : 11 January 2026, 06:50 PM IST
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नई दिल्लीः उत्तर भारत में जारी भीषण शीतलहर के बीच घर को गर्म रखने की कोशिशें जानलेवा साबित हो रही हैं. पिछले कुछ हफ्तों में दिल्ली के आधुनिक फ्लैट्स से लेकर पंजाब और बिहार के ग्रामीण अंचलों तक, रूम हीटर और अंगीठी के कारण दम घुटने और आग लगने की कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं.

मेडिकल एक्सपर्ट्स इसे साइलेंट किलर कह रहे हैं, क्योंकि यह गैस बिना किसी गंध या आहट के सोते हुए इंसान को मौत की नींद सुला देती है. हाल ही में पंजाब के तरनतारन में एक युवा दंपत्ति और उनके एक महीने के मासूम बच्चे की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है.

कार्बन मोनोऑक्साइड का घातक विज्ञान

इस साइलेंट किलर के पीछे का विज्ञान बेहद डरावना है. जब हम लकड़ी, कोयला या गैस को किसी बंद कमरे में जलाते हैं, तो वहां ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने लगता है और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस जमा होने लगती है डॉक्टरों के अनुसार, यह गैस रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन होती है, जिसके कारण पीड़ित को खतरे का एहसास ही नहीं होता. यह गैस फेफड़ों के जरिए खून में पहुंचती है और हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर ऑक्सीजन के प्रवाह को पूरी तरह रोक देती है. इसके प्रभाव से व्यक्ति को गहरी नींद में ही चक्कर आने लगते हैं और वह बेहोश हो जाता है.

इलेक्ट्रिक हीटर और स्वास्थ्य जोखिम

खतरा सिर्फ कोयले वाली अंगीठी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बिजली से चलने वाले हीटर और ब्लोअर भी गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं. दिल्ली के मुकुंदपुर में एक मेट्रो इंजीनियर के परिवार की मौत हीटर में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी आग से हुई. इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रिक हीटर कमरे की हवा से नमी को पूरी तरह सोख लेते हैं. इससे न केवल नाक, गला और त्वचा में सूखापन आता है, बल्कि अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए सांस लेना दूभर हो जाता है. कुछ गंभीर मामलों में, ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी दिमाग में इंटरनल ब्लीडिंग का कारण भी बन सकती है.

बचाव के लिए जरूरी लाइफ-सेविंग टिप्स

डॉक्टरों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इन हादसों से बचने के लिए कुछ अनिवार्य निर्देश जारी किए हैं:

वेंटिलेशन: हीटर या अंगीठी का उपयोग करते समय कमरे की कम से कम एक खिड़की या रोशनदान को थोड़ा खुला रखें.

पूरी रात न जलाएं: सोने से पहले कमरा गर्म कर लें और बिस्तर पर जाने से पहले हीटर को अनिवार्य रूप से बंद कर दें.

नमी का संतुलन: कमरे में एक खुले बर्तन में पानी भरकर रखें ताकि हवा में नमी बनी रहे और श्वसन संबंधी समस्या न हो.

टेक्नोलॉजी का उपयोग: घरों में CO सेंसर लगवाना एक समझदारी भरा कदम है, जो जहरीली गैस का स्तर बढ़ते ही अलार्म बजाकर आपको सचेत कर देता है.

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