Moradabad suicide: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की ड्यूटी निभा रहे सहायक शिक्षक सर्वेश सिंह की आत्महत्या ने प्रशासन से लेकर शिक्षक समुदाय तक सभी को झकझोर कर रख दिया है. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत उन्हें BLO की जिम्मेदारी दी गई थी. आत्महत्या से पहले उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी के नाम एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उन्होंने काम के बढ़ते दबाव और निर्धारित टारगेट पूरा न कर पाने की चिंता जताई. इस घटना ने प्रदेशभर के शिक्षकों में तीखा रोष पैदा कर दिया है और प्राथमिक शिक्षक संघ मृतक के परिवार को मुआवजा व एक आश्रित को नौकरी देने की मांग कर रहा है.
रात 2 बजे तक काम करवाती थी’
मृतक की पत्नी बबली ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उनके पति को बिना किसी ट्रेनिंग के BLO बना दिया गया, जबकि वह स्कूल के हेडमास्टर थे, न कि फील्ड वर्क का अनुभव रखने वाले कर्मचारी. पत्नी ने भावुक होते हुए बताया, “मेरे पति से SIR के फॉर्म भरवाए जा रहे थे, लेकिन उन्हें कोई प्रशिक्षण नहीं मिला. मैं खुद रात 1 से 2 बजे तक उनके साथ बैठकर काम करवा रही थी, फिर भी फॉर्म पूरे नहीं हो पा रहे थे. इसी दबाव ने उन्हें तोड़ दिया.” परिवार का कहना है कि सर्वेश सिंह को 10–15 फॉर्म दिए गए थे, लेकिन न तो पर्याप्त मार्गदर्शन मिला और न ही कोई सहयोगी स्टाफ. इस कारण वह मानसिक दबाव में आ गए और उन्होंने यह कदम उठा लिया.
साथी शिक्षकों की पीड़ा—‘दबाव में थे, पर इतना कदम उठा लेंगे नहीं सोचा था’
मृतक के साथी कुलदीप शर्मा ने बताया कि सर्वेश काम को लेकर तनाव में थे, लेकिन आत्महत्या जैसा कदम उठाएंगे, यह किसी ने नहीं सोचा था. उन्होंने कहा कि BLO के रूप में काम कर रहे कई शिक्षक भारी दबाव झेल रहे हैं, क्योंकि समय पर टारगेट पूरा करने का दबाव बहुत अधिक है. DM ने कहा, “हमारी मांग है कि मृतक के परिवार को नौकरी और उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि छोटे बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके."
DM ने दी प्रतिक्रिया—‘SIR से सीधा संबंध नहीं दिख रहा’
मुरादाबाद के जिलाधिकारी ने मामले में संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है. उनका कहना है कि मृतक का BLO कार्य अंतिम चरण में था, और पहली नजर में आत्महत्या का सीधा संबंध SIR से जुड़ा हुआ नहीं लगता. उन्होंने बताया कि मृतक के सुपरवाइज़र, जो कि उनके रिश्तेदार भी थे, लगातार संपर्क में थे और उनकी सहायता के लिए अतिरिक्त स्टाफ, जिसमें आंगनबाड़ी कर्मी भी शामिल थे, लगाया गया था. DM ने कहा, “फिर भी किन परिस्थितियों में उन्होंने यह कदम उठाया, इसकी जांच जारी है".
यह घटना एक बार फिर उन सवालों को सामने ला रही है कि क्या BLO की ड्यूटी शिक्षकों के लिए अतिरिक्त तनाव और जोखिम का कारण बन रही है. शिक्षक संगठनों का कहना है कि बिना संसाधन, बिना ट्रेनिंग और भारी दबाव में ऐसे कार्य करवाना पूरे सिस्टम की गंभीर खामी को दर्शाता है.