हिंदी-चीनी भाई-भाई की वापसी? भारत सरकार चीनी कंपनियों पर लगी पाबंदियां हटाने पर कर रही विचार

भारत सरकार का वित्त मंत्रालय चीनी कंपनियों पर लगी पुरानी पाबंदियों को हटाने पर विचार कर रहा है. अगर यह योजना लागू होती है, तो चीनी कंपनियों के लिए भारत में सरकारी ठेकों के दरवाजे एक बार फिर खुल सकते हैं.

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नई दिल्ली: दुनिया ने अब तक भारत और चीन के बीच तनाव और टकराव की खबरें ज्यादा देखी हैं, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं. सीमा पर तनाव कम होने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. इसी के साथ भारत और चीन के बीच व्यापारिक सहयोग को लेकर भी नई पहल शुरू होती दिख रही है.

गुप्त जानकारी के अनुसार भारत सरकार का वित्त मंत्रालय चीनी कंपनियों पर लगी पुरानी पाबंदियों को हटाने पर विचार कर रहा है. अगर यह योजना लागू होती है, तो चीनी कंपनियों के लिए भारत में सरकारी ठेकों के दरवाजे एक बार फिर खुल सकते हैं. माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी.

पांच साल पुरानी पाबंदियां हटाने की तैयारी

भारत और चीन के बीच 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद चीनी कंपनियों पर सरकारी ठेकों में हिस्सा लेने को लेकर सख्त नियम लगाए गए थे. इन नियमों के तहत चीनी कंपनियों को रजिस्ट्रेशन, सुरक्षा और राजनीतिक मंजूरी लेना जरूरी था. इन शर्तों की वजह से वे भारतीय सरकारी परियोजनाओं में भाग नहीं ले पा रही थीं.

अब वित्त मंत्रालय इन नियमों को आसान करने और रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता खत्म करने पर काम कर रहा है. इसका मकसद भारत में चल रहे बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना और लागत को कम करना बताया जा रहा है.

सरकारी प्रोजेक्ट्स पर पड़ा असर

सूत्रों के मुताबिक इन पाबंदियों से भारत को भी नुकसान हुआ. कई मंत्रालयों और विभागों में जरूरी प्रोजेक्ट्स में देरी हुई. कई ऐसे मामले हैं जिनमें काम की रफ्तार धीमी पड़ गई थी. यही वजह है कि कुछ विभागों ने चीनी कंपनियों पर लगी रोक हटाने की मांग की है.

अंतिम फैसला प्रधानमंत्री कार्यालय लेगा

सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय द्वारा लिया जाएगा. हालांकि फिलहाल वित्त मंत्रालय या पीएमओ की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. इससे पहले एक उच्च स्तरीय समिति ने भी इन पाबंदियों में ढील देने की सिफारिश की थी.

अमेरिकी टैरिफ भी एक वजह

इस बदलाव को अमेरिका की नीतियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. पिछले साल अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया था, जिससे भारत को आर्थिक नुकसान हुआ. ऐसे में भारत ने अपने पड़ोसी देश चीन के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाया है.

प्रधानमंत्री मोदी के चीन दौरे के बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू हुईं और चीनी पेशेवरों के लिए बिजनेस वीजा प्रक्रिया भी आसान की गई. हालांकि यह साफ किया गया है कि चीनी कंपनियों से जुड़े विदेशी निवेश पर फिलहाल प्रतिबंध बने रहेंगे.