नई दिल्ली: मानसून का मौसम चिलचिलाती गर्मी और तपिश से राहत तो दिलाता है, लेकिन वातावरण में बढ़ती नमी अपने साथ कई मौसमी बीमारियों का जोखिम भी ले आती है. इस मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार के साथ-साथ आंखों का संक्रमण यानी 'आई फ्लू' यानी कंजंक्टिवाइटिस होने लगता है. मानसून के मौसम में वायरस और बैक्टीरिया की सक्रियता अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे हर उम्र के लोग, विशेषकर बच्चे, आसानी से इसकी चपेट में आ जाते हैं. कंजंक्टिवाइटिस एक संक्रामक बीमारी है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलती है.
क्या होता है कंजंक्टिवाइटिस?
कंजंक्टिवाइटिस को आम भाषा में 'आई फ्लू' या 'पिंक आई' भी कहा जाता है. यह आंख की पारदर्शी झिल्ली 'कंजंक्टाइवा' में होने वाली सूजन या संक्रमण है. कंजंक्टाइवा आंख के सफेद हिस्से और पलकों की अंदरूनी परत को ढककर रखती है. जब इसमें संक्रमण या एलर्जी उत्पन्न होती है, तो रक्त वाहिकाएं सूज जाती हैं, जिससे आंखें लाल दिखाई देने लगती हैं. गंदे हाथों से आंखों को छूने, भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने और संक्रमित व्यक्ति के सामान का इस्तेमाल करने से यह संक्रमण तेजी से फैलता है.
पहचानें कंजंक्टिवाइटिस के 5 लक्षण
कैसे करें बचाव
कंजंक्टिवाइटिस से बचने और इसके प्रसार को रोकने के लिए दैनिक जीवन में कुछ सामान्य सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है. बिना हाथ धोए बार-बार आंखों को छूने या मलने से बचें. दिन में कई बार साबुन से हाथ साफ करें. संक्रमित व्यक्ति के तौलिये, रुमाल, तकिए के कवर, मेकअप प्रोडक्ट्स या चश्मे का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. यदि आंखों में थोड़ी सी भी जलन या लालिमा महसूस हो, तो तुरंत कॉन्टैक्ट लेंस निकालना चाहिए और संक्रमण पूरी तरह ठीक होने तक चश्मा ही पहनना चाहिए. इंफेक्शन के दौरान मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल कम से कम करें ताकि आंखों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े. आंखों में तेज दर्द, अत्यधिक धुंधलापन या डिस्चार्ज बढ़ने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें और बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी आई ड्रॉप न डालें.