'पिता की मौत में की मदद', राम कपूर का चौंकाने वाला खुलासा; आखिरी इच्छा ने मां-बहन से बढ़ाईं दूरियां

Lock Upp 2 के लेटेस्ट एपिसोड में राम कपूर ने अपने पिता के कैंसर और उनके आखिरी दिनों से जुड़ा भावुक किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि पिता की अंतिम इच्छा का सम्मान करने के बाद उनकी मां और बहन से उनका रिश्ता आज तक सामान्य नहीं हो पाया.

Date Updated Last Updated : 28 July 2026, 12:07 PM IST
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Courtesy: X/ @kitabi_kidda

मुंबई: नेट्लिक्स पर स्ट्रीम हो रहा रियलिटी शो Lock Upp सीजन 2 पहले दिन से ही लगातार चर्चा में बना हुआ है. वहीं अब शो के एक लेटेस्ट  एपिसोड में एक्टर राम कपूर ने अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ा एक ऐसा एक्सपीरिएंस शेयर किया है, जिसने दर्शकों को इमोशनल कर दिया है. बता दें, शो के इस वीक में कंटेस्टेंट्स को एक-दूसरे के राज सुरक्षित रखने का टास्क दिया गया था. इसी दौरान राम कपूर ने अपने पिता के आखिरी दिनों से जुड़ी ऐसी बात बताई, जिसके बाद घर का माहौल गंभीर हो गया. 

राम कपूर ने क्या बताया 

राम कपूर ने बताया कि उनके पिता को 63 साल की उम्र में पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चला था. डॉक्टरों ने शुरुआत में सर्जरी की संभावना से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने कीमोथेरेपी के कई सेशन लिए. इलाज का असर सकारात्मक रहा और वह करीब एक दशक तक सामान्य जीवन जी सके. हालांकि, बाद में कैंसर दोबारा लौट आया और इस बार बीमारी पहले से अधिक गंभीर थी.

एक्टर ने बताया कि यह सब कोविड-19 महामारी के दौरान हुआ, जब उनके पिता सिंगापुर में थे. उस समय उनके पिता ने उन्हें फोन कर अपनी इच्छा जाहिर की कि अब वह इस बीमारी से और नहीं लड़ना चाहते। राम के मुताबिक, उनके पिता ने उनसे पूछा कि क्या वह उनके आखिरी सफर में उनका साथ देंगे. शुरुआत में यह बात सुनकर वह हैरान रह गए और इसे उनके लिए स्वीकार करना काफी मुश्किल हो गया लेकिन बाद में उन्होंने पिता की भावनाओं को समझा.

मौत का नहीं अकेलेपन का डर 

राम कपूर ने कहा कि जब उनके पिता आईसीयू में भर्ती थे, तब वह उनके साथ मौजूद थे. उन्होंने बताया कि उनके पिता को मौत से नहीं, बल्कि अकेलेपन से डर लगता था. उनकी सिर्फ एक ही इच्छा थी कि अंतिम समय में उनका बेटा उनका हाथ थामे रहे. राम ने कहा कि उन्होंने अपने पिता से किया हुआ यह वादा निभाया और उनके अंतिम क्षणों में उनका साथ नहीं छोड़ा.

मां और बहन नहीं कर रही बात 

उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता चाहते थे कि उनके निधन के बाद कोई शोक न मनाए और उन्हें सम्मान के साथ विदाई दी जाए. इस घटना का असर उनके परिवार पर भी पड़ा. राम ने खुलासा किया कि इस फैसले के बाद उनकी मां और बहन पिछले पांच वर्षों से उनसे बात नहीं कर रही है. अपनी बात के आखिर में एक्टर ने कहा कि उन्हें इस फैसले का कोई पछतावा नहीं है. उनके अनुसार, उन्होंने एक बेटे के रूप में वही किया, जो उनके पिता की आखिरी इच्छा थी. राम ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें जीवन और मृत्यु को अलग नजरिए से समझना सिखाया और अब उन्हें मौत का डर नहीं लगता.

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