नई दिल्ली: पाकिस्तान में सेना और देश की परमाणु कमान से जुड़े ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है. गुरुवार को नेशनल असेंबली ने दो अहम विधेयकों को मंजूरी दे दी, जिनके जरिए सेना की कमान और अधिकारों को नए तरीके से व्यवस्थित करने का प्रस्ताव है. नए कानूनों के तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज यानी सीडीएफ के पद को और शक्तिशाली बनाया गया है. यह पद फिलहाल सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास है.
पिछले साल हुए 27वें संविधान संशोधन के बाद पाकिस्तान ने अपने सैन्य ढांचे में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी. इसके तहत ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद समाप्त कर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का नया पद बनाया गया. इस पद के जरिए सशस्त्र बलों की कमान को एक नए ढांचे के तहत लाने की व्यवस्था की गई है. सीडीएफ के रूप में आसिम मुनीर के पास सेना से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में बड़ी जिम्मेदारी और अधिकार होंगे.
प्रस्तावित कानून के तहत डिफेंस फोर्सेज मुख्यालय की स्थापना का रास्ता भी साफ हो गया है. यह मुख्यालय पाकिस्तान के सशस्त्र बलों के प्रमुख सैन्य केंद्र के रूप में काम करेगा और इसकी कमान सीडीएफ के हाथ में होगी. सीडीएफ राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़े मामलों में प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाएंगे. साथ ही उनके पास सशस्त्र बलों के संचालन, कमान और नियंत्रण से जुड़े अहम अधिकार होंगे. इन मामलों में सीडीएफ संघीय सरकार के प्रति जवाबदेह होंगे.
नए प्रावधानों के तहत सीडीएफ को सशस्त्र बल कानून के दायरे में आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े कई फैसले लेने का अधिकार दिया जाएगा. वह किसी की सेवानिवृत्ति से जुड़े फैसले कर सकेंगे, इस्तीफा स्वीकार या खारिज कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर किसी को सेवा से हटाने या सेवा में बनाए रखने का फैसला भी कर सकेंगे. इसके अलावा, सेवानिवृत्ति की तय उम्र या सेवा अवधि में छूट देने का अधिकार भी सीडीएफ के पास होगा.
संशोधित ढांचे में कमांडर ऑफ द नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड यानी सीएनएससी का पद भी शामिल किया गया है. पिछले महीने जनरल सैयद आमिर रजा को लेफ्टिनेंट जनरल से पदोन्नत कर इस पद का पहला कमांडर नियुक्त किया गया था. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान डिफेंस फोर्सेज एक्ट, 2026 और संशोधित नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2010 नेशनल असेंबली में पेश किए. निचले सदन से मंजूरी मिलने के बाद अब दोनों विधेयक आगे की प्रक्रिया के लिए सीनेट में भेजे जाएंगे. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब पीओके में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध और तनाव बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं.