बांग्लादेश वापस जा सकती शेख हसीना! 3240 करोड़ रुपये का फंड और सैफुल आलम मसूद की सक्रियता

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. अगले साल फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनाव से पहले, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी आवामी लीग की सत्ता में वापसी की योजना ने जोर पकड़ लिया है.

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Sheikh Hasina: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. अगले साल फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनाव से पहले, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी आवामी लीग की सत्ता में वापसी की योजना ने जोर पकड़ लिया है.

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार डेली नया दिगांता की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीति के पीछे एस आलम ग्रुप के चेयरमैन सैफुल आलम मसूद की सक्रिय भूमिका है, जिन्होंने हाल ही में सऊदी अरब, दुबई, दिल्ली और मुंबई की यात्राओं के जरिए इस योजना को गति दी है.

सऊदी अरब में गुप्त मुलाकातें

सैफुल आलम मसूद सिंगापुर से सऊदी अरब पहुंचे. हालांकि उन्होंने इस यात्रा का उद्देश्य उमराह बताया, लेकिन सूत्रों का दावा है कि मक्का के क्लॉक टॉवर होटल में उनकी मुलाकात आवामी लीग के उन नेताओं से हुई, जो वर्तमान में बांग्लादेश से बाहर हैं. इस दौरान एक होटल खरीदने की डील पर भी चर्चा हुई, जिसके लिए विदेश में जमा कथित धन का उपयोग होने की बात सामने आई है.

दिल्ली में शेख हसीना से लंबी बैठक

6 अगस्त को मसूद एक विशेष विमान से दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने ओबेरॉय होटल में ठहरते हुए कई भगोड़े अवामी लीग नेताओं से मुलाकात की. 8 अगस्त को लुटियन्स जोन में शेख हसीना के साथ उनकी साढ़े पांच घंटे की गुप्त बैठक चर्चा का विषय बनी.

इस बैठक में 4500 करोड़ टका (लगभग 3240 करोड़ रुपये) के फंड की व्यवस्था पर सहमति बनी, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय लॉबिंग, राजनीतिक गतिविधियों और संगठनों को सक्रिय करने के लिए किया जाएगा.

फंडिंग और भविष्य की रणनीति

सूत्रों के अनुसार, मसूद ने शेख हसीना की मांग पर 2500 करोड़ टका तत्काल उपलब्ध कराए, जबकि शेष 2000 करोड़ टका नवंबर तक देने का वचन दिया. 11 से 15 अगस्त तक मसूद मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में स्वास्थ्य जांच के लिए रुके और 16 अगस्त को दिल्ली में हसीना से अंतिम मुलाकात के बाद 17 अगस्त को सिंगापुर लौट गए.

2024 में हुए तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं. मसूद की इन गतिविधियों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और विपक्षी दलों में खलबली मचा दी है. यह योजना क्या रंग लाएगी, यह तो भविष्य बताएगा, लेकिन फिलहाल यह बांग्लादेश की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है.