इस्लामाबाद: इस्लामाबाद से सामने आई एक डिजिटल चूक ने पाकिस्तान की कूटनीतिक साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं. शांति वार्ता जैसे संवेदनशील मुद्दे के बीच प्रधानमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक 'मसौदा' ट्वीट का सार्वजनिक हो जाना न केवल हैरान करने वाला था, बल्कि इसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं.
यह मामला तब सामने आया जब शहबाज शरीफ के आधिकारिक अकाउंट से गलती से एक अधूरा और निर्देशों से भरा ट्वीट पोस्ट हो गया. यह पोस्ट कथित तौर पर युद्धविराम से जुड़ा मसौदा था, जो सार्वजनिक नहीं होना चाहिए था. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तान सरकार की काफी आलोचना हुई.
एक वरिष्ठ पत्रकार ने इस पूरे मामले को लेकर एक चौंकाने वाला आरोप लगाया है. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट को संभालने वाले एक निजी सहायक, जिन्हें “पहलवान” के नाम से जाना जाता है, इस गलती के लिए जिम्मेदार हैं. आलम के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति ने व्हाट्सएप से मिले कंटेंट को बिना जांचे-परखे कॉपी-पेस्ट कर दिया.
उन्होंने यह भी दावा किया कि यह व्यक्ति ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है, फिर भी उसे यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है. उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली मंत्री के संरक्षण के कारण हुई है. इस तरह के आरोप पाकिस्तान के प्रशासनिक ढांचे में पेशेवर क्षमता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
इस बड़ी चूक के बावजूद कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति पर सख्त कार्यवाही नहीं की गई. रिपोर्ट्स के अनुसार, उसे केवल हल्की फटकार लगाई गई और कुछ दिनों तक प्रधानमंत्री के सामने पेश न होने को कहा गया. इस नरम रवैये ने भी आलोचनाओं को और तेज कर दिया है.
इस विवाद के बीच पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है. हाल के तनाव के बाद दोनों देशों के बीच वार्ता फिर से शुरू कराने के प्रयास जारी हैं, और माना जा रहा है कि बातचीत की अगली कड़ी जल्द ही पाकिस्तान में हो सकती है.