Pakistan flood 2025: पाकिस्तान का पंजाब प्रांत इस समय मानसूनी बारिश और भीषण बाढ़ की चपेट में है. इस आपदा ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है, और अब तक 20,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. जून 2025 से शुरू हुई मॉनसून की बारिश ने देश में 800 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है.
इस संकट के बीच पाकिस्तानी विशेषज्ञ कमर चीमा ने शहबाज शरीफ सरकार की नाकामी पर गहरी नाराजगी जताई है. उन्होंने खुलासा किया कि 2022 की बाढ़ से निपटने के लिए मिली 11 अरब डॉलर की अंतरराष्ट्रीय सहायता में से केवल 2.8 अरब डॉलर ही उपयोग हो सका.
2022 की बाढ़
2022 में आई विनाशकारी बाढ़ ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया था. इस आपदा से उबरने के लिए विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक, अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कुल 11 अरब डॉलर की सहायता का वादा किया था.
इसमें 4.6 अरब डॉलर तेल वित्तपोषण के लिए और 6.4 अरब डॉलर पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए थे. लेकिन, कमर चीमा के अनुसार, सरकार विश्वसनीय परियोजनाएं प्रस्तुत करने में विफल रही, जिसके चलते इस राशि का बड़ा हिस्सा उपयोग नहीं हो सका.
चीमा ने कहा, “पाकिस्तान में बाढ़ फिर से तबाही मचा रही है, लेकिन हमारी सरकार की अक्षमता चरम पर है. हमारे वित्त मंत्री ने बताया कि 2022 में हमें 11 अरब डॉलर की सहायता मिलनी थी, लेकिन हम कोई ठोस परियोजना पेश नहीं कर सके. नतीजतन, केवल 2.8 अरब डॉलर ही उपयोग में लाया जा सका.”
अंतरराष्ट्रीय सहायता का आंशिक उपयोग
कमर चीमा ने विभिन्न संगठनों से मिली सहायता के उपयोग की स्थिति पर प्रकाश डाला. विश्व बैंक ने 2.2 अरब डॉलर देने का वादा किया था, लेकिन केवल 1.6 अरब डॉलर का उपयोग हो सका. चाइना और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक ने 1.1 अरब डॉलर का वादा किया, लेकिन केवल 250 मिलियन डॉलर का ही इस्तेमाल हुआ. इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक ने 600 मिलियन डॉलर की पेशकश की थी, जिसमें से केवल 231 मिलियन डॉलर प्राप्त हुए.
पेरिस क्लब ने 800 मिलियन डॉलर देने की बात कही थी, लेकिन केवल 139 मिलियन डॉलर मिले. यहां तक कि अमेरिका ने 100 मिलियन डॉलर की सहायता का वादा किया, लेकिन पाकिस्तान केवल 70 मिलियन डॉलर ही ले सका.
नौकरशाही की लापरवाही
कमर चीमा ने सरकार और नौकरशाही की अक्षमता पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार परियोजनाएं तैयार करने में पूरी तरह विफल रही. हम दुनिया को यह नहीं बता सके कि हमें कहां-कहां और कितना पैसा चाहिए.
जब हम परियोजनाएं ही नहीं दे सके, तो कोई हमारी मदद के लिए आगे क्यों आएगा? हमारी नौकरशाही इतनी बड़ी है, फिर भी वह प्रभावी योजनाएं बनाने में नाकाम रही.” उन्होंने यह भी बताया कि शुरू में अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने 30 अरब डॉलर की सहायता की पेशकश की थी, लेकिन बाद में यह राशि 11 अरब डॉलर पर सिमट गई. फिर भी, सरकार इस राशि का पूरा उपयोग नहीं कर सकी.
भविष्य की चिंताएं
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही संकटग्रस्त है, और इस तरह की नाकामियां स्थिति को और गंभीर बना रही हैं. कमर चीमा ने चिंता जताते हुए कहा, “दुनिया हमारे साथ खड़ी थी, लेकिन हमारी सरकार ने अवसर गंवा दिया. अब फिर से बाढ़ आई है और फिर से भारी धनराशि की जरूरत होगी.
ऐसी स्थिति में हम 21वीं सदी में एक मजबूत अर्थव्यवस्था कैसे बनाएंगे?” उन्होंने वित्त मंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2047 तक पाकिस्तान 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता.