नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक बार फिर नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं. अगस्त 2024 से भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा दिल्ली के प्रेस क्लब में दिए गए ऑडियो संबोधन ने ढाका में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस पर हैरानी और स्तब्धता जताते हुए भारत सरकार के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. वहीं शेख हसीना के इस संबोधन ने दिल्ली और ढाका के बीच कोल्ड वॉर जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।
निर्वासन के बाद अपने पहले सार्वजनिक भाषण में 78 वर्षीय हसीना ने सीधा हमला वर्तमान अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस पर बोला. 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले हसीना ने देशवासियों से अपील की कि वे यूनुस सरकार को उखाड़ फेंकें. उन्होंने यूनुस को सत्ता का भूखा गद्दार और विदेशी कठपुतली करार दिया.
हसीना ने आरोप लगाया कि उनके हटने के बाद बांग्लादेश आतंक के युग में डूब गया है, जहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर जुल्म हो रहे हैं और प्रेस की आजादी खत्म हो गई है. हसीना के इस भाषण के तुरंत बाद ढाका के विदेश मंत्रालय ने सख्त बयान जारी किया.
मंत्रालय ने कहा कि एक सजायाफ्ता और सामूहिक हत्यारी को भारतीय राजधानी से नफरत भरा भाषण देने की अनुमति देना बांग्लादेश की जनता का अपमान है. यह एक ऐसी खतरनाक मिसाल है जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है. याद रहे कि नवंबर में ढाका की एक अदालत ने हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में हत्या और अत्याचारों के लिए दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी.
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर 12 फरवरी को होने वाले चुनावों पर पड़ता दिख रहा है. अवामी लीग के नेताओं का तर्क है कि उनकी पार्टी की भागीदारी के बिना चुनाव कभी भी निष्पक्ष नहीं हो सकते. वहीं, भारत के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उसे एक तरफ अपने पड़ोसी देश की भावनाओं का सम्मान करना है और दूसरी तरफ अपनी पुरानी सहयोगी हसीना की सुरक्षा और उपस्थिति को संतुलित करना है.