नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद भारत सरकार की चुप्पी को लेकर अब सियासी बहस तेज हो गई है. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है. उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि चुप रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचने जैसा है.
सरकार ने अब तक खामेनेई की मौत पर सीधा बयान जारी नहीं किया है, हालांकि उसने पश्चिम एशिया में संयम और तनाव कम करने की अपील की है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत का रुख राष्ट्रीय हितों और वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखकर तय किया जाता है.
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि चल रही वार्ताओं के बीच किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की टारगेटेड हत्या कर दी गई है, यह इंटरनेशनल रिलेशन में गंभीर दरार का संकेत है. उनके मुताबिक, भारत जैसे बड़े लोकतंत्र से स्पष्ट प्रतिक्रिया की उम्मीद की जाती है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआती बयान में घटनाक्रम के पूरे संदर्भ का उल्लेख नहीं किया. इस दौरान सोनिया गांधी ने सीधे तौर पर पीएम मोदी पर निशाना साधा है.
सोनिया गांधी ने इस दौरान तर्क दिया कि यदि भारत संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर साफ रुख नहीं अपनाता है, तो उसकी वैश्विक विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत को सिद्धांत आधारित कूटनीति पर कायम रहना चाहिए, न कि परिस्थितियों के अनुसार चुप्पी साधनी चाहिए.
विपक्ष नेता ने 1994 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामिक सहयोग संगठन में कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रस्ताव को रोकने में तेहरान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. साथ ही, ईरान में भारत की राजनयिक मौजूदगी और रणनीतिक सहयोग का भी जिक्र किया.
गांधी ने आगे कहा कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं. ऐसे में क्षेत्रीय अस्थिरता भारत के लिए रणनीतिक चुनौती है. उनके अनुसार, भारत यदि ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करना चाहता है, तो उसे सिद्धांतों पर स्पष्ट और साहसिक रुख अपनाना होगा.