नई दिल्ली: अमेरिका और यूरोप के बीच 'ग्रीनलैंड' को लेकर छिड़ा विवाद अब एक बड़े आर्थिक युद्ध में बदलता दिख रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद फ्रांस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
फ्रांस की कृषि मंत्री एनी जेनेवार्ड ने साफ लहजे में कहा है कि अगर ट्रंप व्यापारिक तनाव बढ़ाते हैं, तो इसका खामियाजा खुद अमेरिका को भी भुगतना पड़ेगा. ट्रंप का यूरोप के खिलाफ यह वार लोगों को समझ नहीं आया. अमेरिका के लिए अब ट्रंप एक डिक्टेटर के तौर पर काम कर रहे हैं. आने वाले समय में यूरोप और अमेरिका के रिश्ते खराब होते दिख रहे हैं.
जेनेवार्ड ने कहा कि ट्रंप की यह टैरिफ बमबारी सिर्फ यूरोप नहीं, बल्कि अमेरिकी किसानों और उद्योगपतियों के लिए भी विनाशकारी साबित होगी. उन्होंने कहा, "यूरोपीय देश अमेरिका को अपनी मनमानी नहीं करने देंगे. ग्रीनलैंड को खरीदने की कोई भी कोशिश पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' है."
शनिवार को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर घोषणा की थी कि 1 फरवरी, 2026 से फ्रांस, जर्मनी, यूके और डेनमार्क समेत 8 देशों पर 10% टैरिफ लगेगा. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड की बिक्री पर समझौता नहीं हुआ, तो 1 जून, 2026 से टैरिफ बढ़कर 25% हो जाएगा.ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड का नियंत्रण जरूरी है.
विवाद की ताजा वजह नाटो का सैन्य अभ्यास आर्कटिक एंड्योरेंस बना है. इस अभ्यास के तहत यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य कर्मी भेजे थे, जिसे ट्रंप ने अमेरिका के हितों के खिलाफ माना है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका दशकों से इन देशों को सुरक्षा और सब्सिडी दे रहा है, लेकिन अब रिटर्न देने का समय आ गया है.
फ्रांसीसी मंत्री ने पुष्टि की है कि यूरोपीय संघ के पास व्यापारिक मोर्चे पर जवाबी कार्रवाई करने की पूरी शक्ति है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तनाव को सावधानी से संभालने की जरूरत है, क्योंकि युद्ध की स्थिति दोनों तरफ की अर्थव्यवस्थाओं को तबाह कर सकती है.