नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेंटागन को साउथ कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को कम करने का निर्देश दिया है. ट्रंप ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका और साउथ कोरिया वार्षिक उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास की तैयारी कर रहे हैं. इस फैसले के पीछे ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी हवाला दिया है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अभ्यास को पूरी तरह रद्द करना अब संभव नहीं है, लेकिन वह इस बात से संतुष्ट नहीं हैं कि अमेरिका ने इसमें शामिल होने पर सहमति दी थी. उन्होंने कहा कि यह सैन्य अभ्यास काफी खर्चीला है और उत्तर कोरिया के लिए गलत संदेश भी देता है.
Based on my very good relationship with Kim Jong Un, of North Korea, I am not happy with the fact that the United States has, long ago, agreed to participate in Joint Military Exercises with South Korea. These exercises are not only costly, with much of these costs paid for by… pic.twitter.com/IcVjiJyDX9
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) August 16, 2026
ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में उत्तर कोरिया की ओर से अमेरिका को कोई बड़ा खतरा नहीं रहा और दोनों देशों के बीच सम्मानजनक संबंध रहे हैं.
उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास 17 अगस्त से 27 अगस्त तक प्रस्तावित है. इसमें करीब 18 हजार साउथ कोरियाई सैनिक हिस्सा लेने वाले हैं. अभ्यास के दौरान ड्रोन हमलों से निपटने, साइबर हमलों का जवाब देने और जीपीएस सिग्नल में बाधा जैसी परिस्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग शामिल है. इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य उत्तर कोरिया की बदलती सैन्य क्षमताओं के खिलाफ अमेरिका और साउथ कोरिया की संयुक्त तैयारी को मजबूत करना है.
ट्रंप ने साउथ कोरिया के ईरान को लेकर रुख पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में साउथ कोरिया के राष्ट्रपति से पूछा था कि क्या वह ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखने की अमेरिकी कोशिश में साथ देना चाहेंगे. ट्रंप के मुताबिक, साउथ कोरिया ने इसमें रुचि नहीं दिखाई.
उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका और साउथ कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संभावित हमले की तैयारी बताकर विरोध करता रहा है. हाल के दिनों में उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण भी किए हैं. वहीं, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल होकर उत्तर कोरियाई सैनिकों ने ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और साइबर ऑपरेशन जैसी आधुनिक युद्ध तकनीकों का अनुभव हासिल किया है. हालांकि, बाद में ट्रंप के रुख में बदलाव आया और उन्होंने सैन्य अभ्यास को लेकर अपना फैसला वापस ले लिया.